(लीड) मुख्यमंत्री ने अरुणा आसफ अली अस्पताल का किया औचक निरीक्षण, सुविधाओं को दुरुस्त करने के दिए निर्देश

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नई दिल्ली, 23 अप्रैल । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को अरुणा आसफ अली अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ओपीडी, वार्ड, दवा वितरण केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था, जल आपूर्ति, डिजिटल सेवाओं और अन्य संबंधित विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने उपचार के लिए मरीजों और उनके परिजनों से सीधे संवाद कर अस्पताल की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। मरीजों और उनके परिजनों की शिकायत पर तुरंत एक्शन लेते हुए ने अस्पताल के अधिकारियों को सभी सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

संवाद के दौरान कुछ बुजुर्ग मरीजों ने मुख्यमंत्री को बताया कि सुबह 8 बजे से लंबी कतार में खड़े हैं और अब तक उनकी बारी भी नहीं आई। मुख्यमंत्री ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि बीमार और बुजुर्ग मरीजों को घंटों खड़ा रहना पड़े। अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और सुचारू टोकन प्रणाली तुरंत लागू की जाए।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की उपलब्धता, ओपीडी में मरीजों की भीड़, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम और टोकन व्यवस्था में खामियां पाए जाने को लेकर भी अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।

मुख्यमंत्री ने पाया कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम होने के बावजूद मरीजों को लंबी कतारों से राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रणालियों को इस तरह एकीकृत किया जाए कि मरीजों का प्रतीक्षा समय न्यूनतम हो। ऑर्थोपेडिक विभाग में भारी भीड़ को देख मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से उनकी कार्यप्रणाली पर चर्चा की और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को कहा।

संवाद के दौरान कई मरीजों ने अस्पताल में दवाओं की अनुपलब्धता और बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही स्टॉक रजिस्टर की जांच के निर्देश दिए और कहा कि दवाइयों और वैक्सीन की उपलब्धता में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। जिस दवा की जरूरत आज है, वह आज ही मिलनी चाहिए। जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान करना गंभीर लापरवाही है। निरीक्षण के दौरान वैक्सीनेशन यूनिट में रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों को रेबीज और अन्य इंजेक्शन दिए जाने की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने दवाइयों और वैक्सीन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में स्वच्छता, जल आपूर्ति और अन्य सुविधाओं के संबंध में भी फीडबैक दिया। कई मरीजों द्वारा स्वच्छता में कमी और शौचालय व पानी की समस्याओं की जानकारी दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब मरीज और स्टाफ खुद समस्याएं बता रहे हैं तो इन्हें अनदेखा करना गंभीर लापरवाही है। अस्पताल में स्वच्छता, दवाइयों और मूलभूत सुविधाओं की कमी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए कड़े प्रशासनिक सुधारों के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही सर्वोपरि है। इसके लिए डॉक्टरों और स्टाफ की नियमितता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई है और पारदर्शिता के लिए हर कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान नेम प्लेट पहनना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने अस्पताल में बढ़ते हेपेटाइटिस के मामलों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और इसके कारणों की जांच एवं रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने के लिए डॉक्टरों से राय ली और उचित दिशा निर्देश दिए।