मौके पर मौजूद नहीं होने का बचाव नहीं ले सकते केस के शुरुआती स्तर पर-हाईकोर्ट

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जयपुर, 31 मार्च । राजस्थान उच्‍च न्‍यायालय ने कहा है कि आपराधिक मामले में प्रसंज्ञान के स्तर पर आरोपित यह बचाव नहीं ले सकते कि वह घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था। अदालत ने कहा कि निचली अदालत इस तथ्य को केस के उचित स्तर पर देखेगी। इसके साथ ही अदालत ने मामले में दायर याचिका का निस्तारण कर दिया है। जस्टिस अनूप कुमार की एकलपीठ ने यह आदेश संजय सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में कहा गया कि अजमेर की निचली अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ विभिन्न धाराओं में 15 जनवरी, 2019 को प्रसंज्ञान लिया था। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि मामले में जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ जांच लंबित रखते हुए अन्य सह आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। इस दौरान शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत निचली अदालत में परिवाद पेश किया। वहीं मृतक की पत्नी के बयान के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया गया। जबकि जांच एजेंसी की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया था कि याचिकाकर्ता घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।