जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर राजनीति कर रही है आआपा : सत्या शर्मा - सरस जनवाद

जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर राजनीति कर रही है आआपा : सत्या शर्मा

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नई दिल्ली, 22 मार्च । दिल्ली नगर निगम में स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आआपा) जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी अनावश्यक राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आआपा के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज इस विषय को बिना कारण राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में संदिग्ध एवं अवैध गतिविधियों का खुलासा करना पूरी तरह से जनता की सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है, न कि राजनीति का।

सत्या शर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दिल्ली के हित में यह मुद्दा उठाया, लेकिन आआपा इसे भटकाने और राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी हर गंभीर विषय को भी राजनीतिक चश्मे से देखने की आदी हो चुकी है। उन्होंने सौरभ भारद्वाज को सलाह दी कि वे हर मुद्दे पर बयानबाजी करने के बजाय दिल्ली की जनता के हित में सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी है और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना उसका दायित्व है। चांदनी चौक क्षेत्र में किए गए निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हुआ है, जो प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता की आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आआपा को इन कार्रवाइयों से असहजता हो रही है, जिससे यह सवाल भी उठता है कि कहीं इन गतिविधियों से उनके कुछ नेताओं के संबंध तो नहीं हैं।

सत्या शर्मा ने कहा कि आआपा ने सत्ता में रहते हुए भी जनता के हितों की अनदेखी की और अब विपक्ष में आने के बाद भी उसका रवैया नहीं बदला है।

सत्या शर्मा ने यह भी कहा कि आआपा के नेता मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी इसी तरह जनता के मुद्दों की अनदेखी कर केवल राजनीतिक बयानबाजी में उलझी रही, तो आगामी चुनावों में उसका जनाधार और कमजोर हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि आआपा की निष्क्रियता और खराब कार्यप्रणाली के कारण ही उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। पंजाब, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में भी पार्टी का जनाधार घट रहा है, जो उसकी नीतियों और कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।