मुख्य सचिव ने चेस्टर हिल भूमि मामले में आरोपों को बताया बेबुनियाद, पूर्व उच्च अधिकारियों पर साज़िश के आरोप

Share

शिमला, 31 मार्च । सोलन के चेस्टर हिल भूमि मामले को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि संबंधित जमीन की खरीद सरकार की विधिवत अनुमति के बाद की गई थी और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।

मुख्य सचिव ने मंगलवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि उनके खिलाफ तीन एकड़ जमीन कम कीमत पर खरीदने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। उनका कहना है कि जमीन का कलेक्टर रेट करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये था, जबकि उन्होंने इसे लगभग 1 करोड़ 35 लाख रुपये में खरीदा। ऐसे में कम कीमत पर जमीन लेने का आरोप सही नहीं ठहरता।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर छोटा शिमला पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत भ्रामक और प्रेरित है। उनके अनुसार कुछ पूर्व सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से उनके खिलाफ षड्यंत्र के तहत इस मामले को उछाला जा रहा है। मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर संबंधित मामले में एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को पद से हटाने की मांग भी की है और उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि चेस्टर हिल परियोजना से जुड़ी फाइल उनके पास आने पर उन्होंने कोई नया आदेश जारी नहीं किया था बल्कि केवल अपनी राय दर्ज की थी। उनके अनुसार परियोजना से जुड़े आदेश पहले ही संबंधित स्तर पर जारी किए जा चुके थे और उन्हें अदालत की ओर से भी निरस्त नहीं किया गया है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि परियोजना में कोई अनियमितता थी तो उसे नियामक स्तर पर मंजूरी कैसे मिली।

उन्होंने अपने पिछले प्रशासनिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने बिजली क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम में जिम्मेदारी निभाते हुए हजारों करोड़ रुपये का लाभ दिलाया था। उनका कहना है कि इसी कार्यप्रदर्शन के आधार पर सरकार ने उन्हें वर्तमान दायित्व सौंपा, लेकिन कुछ अधिकारियों को यह स्वीकार नहीं हो रहा है।

मुख्य सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली क्षेत्र से जुड़े कुछ पुराने मामलों में नियमों की अनदेखी को लेकर पहले से जांच चल रही है और संबंधित मामलों की पड़ताल विभिन्न एजेंसियों के स्तर पर जारी है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।