ज्ञान और संस्कार का संबल बनते शिक्षक– देवनानी

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उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार तकनीकी दुनिया में शिक्षक ही वह संतुलन हैं जो ज्ञान और संस्कार की नदियों को सूखने नहीं देते। शिक्षक बच्चों को आज से जोड़कर भविष्य तक पहुँचाने वाले पुल हैं। इसलिए इस अवसर पर केवल शिक्षक का सम्मान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संदेश को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। वासुदेव देवनानी ने कहा कि गुरु-परंपरा ने हमें यह सिखाया है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक और समाज को उज्ज्वल बनाने का माध्यम है। शिक्षक दिवस पर हमें इस परंपरा को आगे बढ़ाने और शिक्षकों की भूमिका को और सशक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए।