भाखड़ा नहर के जल बंटवारे को लेकर हरियाणा और पंजाब सरकार के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिनों से दोनों राज्यों की सरकारों के बीच इस मुद्दे को लेकर सीधी नोकझोंक जारी है। हरियाणा में पानी संकट की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने सभी जिलों के अधिशासी अभियंताओं (एसई), कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईन), सहायक अभियंताओं (एसडीओ) एवं जूनियर इंजीनियरों (जेई) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन्हें अपने मुख्यालय से बाहर नहीं जाना है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां इसकी उपलब्धता के लिए दूसरे स्थानों से जल लाया जाए। अधिकारियों ने मंत्री को सूचित किया है कि हिसार, सिरसा, महेंद्रगढ़, नारनौल और फतेहाबाद जैसे जिलों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर है, जहां पेयजल की राशनिंग की जा रही है।
इस समस्या को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिवों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, पंजाब के मुख्य सचिव की छुट्टी पर होने के कारण उनके स्थान पर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर और जल विभाग के प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार शामिल होंगे। इस बैठक में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस मुद्दे को लेकर हरियाणा सरकार उच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए अटॉर्नी जनरल को आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा गया है।
पंजाब सरकार ने इस विवाद को और बढ़ाने के लिए आज सुबह सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा को घेरना और केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है। वहीं, पंजाब भाजपा ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। गौरतलब है कि पंजाब ने पिछले 17 दिनों से भाखड़ा नहर के जरिए हरियाणा को मिलने वाले 8500 क्यूसेक पानी को घटाकर 4000 क्यूसेक कर दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह आरोप लगाया है कि हरियाणा मार्च तक अपने हिस्से का पानी खत्म कर चुका था और 4000 क्यूसेक पानी भी मानवीय आधार पर दिया जा रहा है।
पानी विवाद के बढ़ते हुए संकट के बीच पंजाब सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। BBMB की आपात बैठक के बाद, नंगल डैम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, और पंजाब पुलिस को डैम के कंट्रोल रूम की चाबी सौंप दी गई है। इसके अलावा, राज्य के नेता और विधायक इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ ही, AAP ने चंडीगढ़ में एक बैठक आयोजित की है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे। मीटिंग के बाद, पार्टी ने आज सुबह 10 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है और सोमवार को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें हरियाणा को पानी न देने के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन पक्ष पंजाब के हित में है।
पानी विवाद के बढ़ते तनाव के बीच BBMB में भी कई प्रशासनिक परिवर्तन किए गए हैं। पानी के विवाद के चलते पंजाब कोटे में नियुक्त वाटर रेगुलेशन डायरेक्टर इंजीनियर आकाशदीप को हटा दिया गया है, जबकि हरियाणा कोटे के इंजीनियर संजीव कुमार को उनकी जगह नियुक्त किया गया है। इस तरह से यह मामला न केवल दोनों राज्यों के लिए बल्कि पूरे देश के जल प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। दोनों पक्षों के नेताओं के महत्वपूर्ण बयान और उनकी कार्रवाई इस पूरे विवाद के भविष्य को निर्धारित करेंगे।