पन्ना : सबसे प्राचीन पांचवी सदी का नचने कुठार पार्वती मंदिर
पन्ना, 16 अप्रैल (हि.स.)। बुंदेलखंड की धरती शक्ति की आराधना का केंद्र रही है। प्राचीन काल से ही पन्ना में शक्ति की पूजा होती रही है। इसके साक्ष्य भी आज भी मौजूद हैं। इतिहास भी अपने पन्नों में इसे संजोए हुए हैं। देश के सबसे पुराने मंदिरों में एक पांचवीं सदी गुप्तकाल का माता पार्वती मंदिर आज भी यहां मौजूद है। यह मंदिर सलेहा के नचने कोठार गांव में है, लेकिन मंदिर में माता पार्वती की प्रतिमा नहीं है। सामने ही भगवान चौमुखनाथ का प्रसिद्ध मंदिर भी है। ये केंद्र संरिक्षत स्मारक हैं। दोनों मंदिरों में देश और दुनिया से लोग श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ दर्शन करने आते हैं।
नचने गांव में पश्चिम की ओर मुख वाला माता पार्वती का मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है। मूल रूप से इसमें दोहरी सपाट छत थी, लेकिन अब ऊपरी छत नहीं है। नचने का यह पार्वती मंदिर गुप्त काल का है। यह एक चबूतरे पर बना है। 35 फीट चौड़ा, मंदिर एक छोटे चौकोर गर्भगृह से बना है, जिसकी भुजा 15 फीट है। गर्भगृह का कक्ष 6.5 फीट व्यास का है। मूल योजना को देखने पर यह स्पष्ट है कि मंदिर चारों तरफ से एक मार्ग से घिरा हुआ था। पश्चिम की ओर मुख वाला मंदिर है, जो अन्य हिंदू मंदिरों के विपरीत है जो पूर्व की ओर मुख किए हुए हैं। गर्भगृह का द्वार गंगा और यमुना नदी देवियों के साथ बारीक नक्काशीदार संरक्षकों से घिरा है।
पार्वती मंदिर के ठीक सामने की ओर चौमुख नाथ महादेव मंदिर है। इसका अपना इतिहास भी अनोखा है। अति प्राचीन इस मंदिर में भगवान शिव के चार मुख वाली प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का हर मुख अलग-अलग रूप वाला है। चतुर्मुखी प्रतिमा में एक मुख भगवान के दूल्हे के वेष का है। इसको गौर से देखने पर भगवान के दूल्हे के रूप के दर्शन होते हैं। दूसरे मुख में भगवान अर्द्धनारीश्वर रूप में हैं। तीसरा मुख भगवान का समाधि में लीन स्थिति का है और चौथा उनके विषपान करने का है। प्रतिमा का सूक्ष्मता के साथ दर्शन करने पर सभी रूप उभरकर आते हैं। यह प्रतिमा अपने आप में अद्भुद और दुर्लभ है। पुरातत्व विभाग के अनुसार मंदिर की दीवारें सादी हैं। छिद्रित खिड़कियां लगी हैं। दीवारों में गुप्त काल के नक्काशीदार पैनल, घुमावदार मीनार और मेहराब जैसी आकृतियाँ विशेषता हैं। इसमें 9वीं शताब्दी का चार मुख वाला शिवलिंग है, दक्षिण की ओर भगवान का उग्र खुला मुख है।
जिला पुरातत्व पर्यटन एंव संस्कृति परिषद के सदस्य मुकेश पांडेय के अनुसार, देश के सबसे पुराने मंदिरों में एक पार्वती मंदिर माता की मूर्ति मौजूद नहीं है। मूर्ति को लेकर अनेक किंवदंतियां हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर से मूर्ति चोरी हो गई थी, कुछ ग्रामीणों का कहना है नजदीकी जिले दमोह में मौजूद हैं, लेकिन इन किंवदंतियों के कोई भी साक्ष्य या प्रमाण मौजूद नहीं है। पुरातत्व महकमे ने जब मंदिर को अपने संरक्षण में लिया तब मंदिर में मूर्ति मौजूद नहीं थी।
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