संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रमुख नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को आज पटियाला के अस्पताल से छुट्टी मिलने जा रही है। ठीक उसके बाद, वह अपने पैतृक गांव डल्लेवाल, जो जिला फरीदकोट में स्थित है, वापस जाएंगे। वहां, वह किसानों की एक महत्वपूर्ण महापंचायत में शामिल होंगे और इस अवसर पर किसानों को दो मिनट का संदेश देंगे। इस बात की जानकारी किसान नेता अभिमन्यु सिंह कोहाड़ ने साझा की है। डल्लेवाल ने आगामी दिनों में किसानों के संघर्ष को तेज करने के लिए अप्रैल से मई तक की गतिविधियों का एक विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है। इन कार्यक्रमों का आयोजन पंजाब और हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर किया जाएगा।
पिछले दिन, पटियाला में किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जो मोर्चे को समाप्त करने के बाद सभी किसानों की पहली सामूहिक बैठक थी। जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन अब 129वें दिन में प्रवेश कर गया है, जिसमें वे फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित 13 महत्वपूर्ण मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। डल्लेवाल ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, उनका संर्घष इसी प्रकार जारी रहेगा। उनके कार्यक्रमों की श्रृंखला 3 अप्रैल को डल्लेवाल महापंचायत के साथ शुरू होगी, और इसके बाद कई स्थानों पर आयोजनों का आयोजन किया जाएगा।
किसानों ने 13 फरवरी 2024 को दिल्ली की ओर कूच करने का प्रयास किया, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पक्के बैरिकेड लगा दिए। इसके विपक्ष में, किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने का निश्चय किया और दोनों मोर्चों पर डटे रहे। हालात तब बिगड़े जब 19 मार्च 2025 को किसानों की केंद्र सरकार के साथ मीटिंग के बाद, पंजाब पुलिस ने उन्हें वापस लौटते समय हिरासत में ले लिया। इसके परिणामस्वरूप, शंभू और खनौरी बॉर्डर से मोर्चे हटा दिए गए।
डल्लेवाल की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें जल्द ही अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया था। पहले पटियाला के अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर जालंधर के पिम्स अस्पताल में, जहां उन्हें अंतरिक्ष में शिफ्ट किया गया। हालांकि, मीडिया के जुटान के बाद उन्हें फिर से पटियाला भेजा गया। इस संवेदनशील मामले ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को भी आकर्षित किया, जहां उनकी हिरासत और परिवार के साथ मिलने की स्थिति पर सवाल उठाए गए।
किसानों की रिहाई के पश्चात, डल्लेवाल ने पानी पीना शुरू किया है, लेकिन सरकार द्वारा कोर्ट में कहा गया कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। हालांकि, किसानों का कहना है कि उनका अनशन जारी है। इसके अलावा, कहा गया है कि मोर्चे हटाने के बाद 135 ट्रॉलियों का चोरी होना एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जो कि पंजाब विधानसभा से लेकर संसद तक का विषय बन गया है। इस स्थिति को लेकर किसानों और सरकार के बीच का संघर्ष अब भी जारी है, जिससे यह साफ है कि उनके प्रयास और संघर्ष जारी रहेंगे।