पंजाब में खनौरी और शंभू बॉर्डर पर किसानों के धरनों को मजबूरन समाप्त करवाए जाने के घटनाक्रम के बाद अब किसान संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष की योजना बनाई है। भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर ने इस पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में किसान महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस गतिविधि की शुरुआत आज यानी 3 अप्रैल को फरीदकोट के डल्लेवाला गांव से की जाएगी, जो संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष और प्रमुख किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का पैतृक गांव है।
योजना के मुताबिक, पहले तय किए गए तीन महापंचायत कार्यक्रम, जो 6, 7 और 8 अप्रैल को सरहिंद, धनौला और श्री मुक्तसर साहिब के गांव दोदा में आयोजित होने थे, अब जिला स्तर पर पूरे राज्य के लिए पुनर्विविचारित किए गए हैं। हर जिले में अब एक अलग महापंचायत होगी, जो कि पहले से अधिक स्थानीय और केंद्रित होगी। इस बदलाव के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि फरीदकोट में होने वाली महापंचायत में लगभग 8 से 10 हजार किसान प्रतिभाग कर सकते हैं।
गांव डल्लेवाला में इस महापंचायत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, जिससे इसका महत्व बढ़ गया है। गांव के सरपंच सिमरनजीत सिंह ने बताया कि हालांकि वह कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं, लेकिन इस महापंचायत में वह एक किसान की भूमिका निभाते हुए भाग ले रहे हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि सभी किसान संगठनों की एकजुटता और उनके समर्थन में किसी भी राजनीतिक प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर एक सामूहिक स्वरूप में काम करने की भावना प्रबल है।
बीकेयू एकता सिद्धूपुर के जिलाध्यक्ष बोहड़ सिंह ने कहा कि महापंचायत में जगजीत सिंह डल्लेवाल सहित एसकेएम पांच संगठनों और किसान मजदूर मोर्चा भारत से जुड़े सभी वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इस महापंचायत में राज्य सरकार के खिलाफ एक ठोस संघर्ष योजना की घोषणा की जाएगी, जिससे किसानों की मांगों को लेकर एकजुटता और संवाद को मजबूती मिलेगी।
इस आंदोलन के पीछे की मंशा स्पष्ट है कि किसान संगठनों ने अपने अधिकारों की रक्षा और अपनी आवाज को उठाने का इरादा किया है। महापंचायतों का यह सिलसिला न सिर्फ किसानों को एकत्रित करने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि यह सरकार पर दबाव भी बनाएगा कि वे किसानों के मुद्दों को गंभीरता से लें। ऐसे में देखा जाए तो पंजाब में किसानों की एकजुटता और राज्य सरकार के प्रति उनकी आवाज ने एक नई दिशा को जन्म दिया है।