पंजाब के कपूरथला जिले में एक गर्भवती महिला के साथ दहेज के कारण उसके ससुरालियों ने घिनौनी हरकत की है। पीड़िता बलविंदर कौर ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उसकी शादी लगभग तीन साल पहले गांव भदास के निवासी अमनदीप सिंह से हुई थी। इस दांपत्य जीवन में पीड़िता का एक बड़ा बेटा भी है, जिसे ससुराल वाले अपने पास ही रख लेते हैं। बलविंदर कौर का आरोप है कि शादी के प्रारंभिक दिनों से ही उसके पति और सास, किरन ने दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देना शुरू कर दिया।
पीड़िता के परिवार ने कई बार ससुराल वालों के सामने समझौता करने की कोशिश की, लेकिन अमनदीप और उसकी मां ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। बलविंदर कौर के गर्भवती होने के बावजूद, उसके पति और सास ने उसे निरंतर मानसिक प्रताड़ना देते रहे। एक बिंदु पर, उनकी क्रूरता इतनी बढ़ गई कि उन्होंने उसे घर से बाहर निकाल दिया। यह घटना न केवल परिवार के लिए शर्मिंदगी का कारण बनी, बल्कि यह स्थानीय समाज में दहेज प्रथा की बुराई को भी उजागर करने का काम कर रही है।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद, थाना बेगोवाल पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बलविंदर कौर की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया। एएसआई अरविंदरजीत सिंह ने बताया कि पति अमनदीप सिंह और सास किरन के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नही हुई, लेकिन पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
गर्भवती महिला द्वारा उठाए गए इस कदम को समझते हुए, स्थानीय प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इस तरह के मामलों में अक्सर पीड़ित महिलाएं अंततः खामोश हो जाती हैं, लेकिन बलविंदर का साहस नए सिरे से चर्चित हो रहा है। यह घटना समाज में दहेज की कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का एक प्रतीक बन सकती है, जिससे अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे भी अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती हैं।
इस केस ने दहेज के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूत किया है और समाज में इस पुरानी परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की है। पुलिस का यह प्रयास सुझावित करता है कि दहेज प्रथा को समाप्त करने में केवल कानूनी उपाय ही नहीं, बल्कि सामाज में सामूहिक प्रयास भी आवश्यक हैं। बलविंदर कौर जैसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि समाज को इस बुराई के खिलाफ एकजुट होने की आवश्यकता है ताकि कोई अन्य महिला इस प्रकार की मानसिक यातना का सामना न करने पावे।