पर्ल ग्रुप के 45,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोढ़ा कमेटी की नियुक्ति की है। इस संबंध में, पर्ल सिटी मोहाली और बठिंडा में स्थित पर्ल्स सिटी/पर्ल्स टाउनशिप के आवंटियों को अपने आवश्यक दस्तावेज जमा करने का एक अंतिम अवसर प्रदान किया गया है। आवंटियों को 10 फरवरी तक अपनी सेल एग्रीमेंट, सेल डीड, पेमेंट प्रूफ और बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए पेश करना होगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कि सभी जानकारी एकत्र की जा सके, आवंटियों को अपने दस्तावेज ईमेल या डाक के माध्यम से विशेष पते पर पहुंचाने होंगे, जहां शाम 5 बजे तक उन्हें जमा कराना आवश्यक है।
यह मामला 2016 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जब पर्ल सिटी के आव allotियों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए याचिका दायर की थी। इसके परिणामस्वरूप, सर्वोच्च न्यायालय ने मामले के ऑडिट का आदेश दिया था, जिसकी रिपोर्ट अब कोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है। पर्ल सिटी मोहाली रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव जसपाल सिंह ने इस बात की पुष्टि की है कि 788 अलॉटियों का रिकॉर्ड भी कोर्ट में जमा कर दिया गया है। यह प्रक्रिया उन सभी प्रभावित व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जो कई वर्षों से इस मामले का इंतजार कर रहे हैं।
इस घोटाले के प्रमुख आरोपी, निर्मल सिंह भंगू, जो पर्ल ग्रुप के मालिक थे, को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था। वह तिहाड़ जेल में बंद थे और दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु 5 अगस्त 2024 को हो गई। भंगू की बेटी, बरिंदर कौर भंगू ने इस दौरान कहा था कि वह सभी निवेशकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जब तक सभी निवेशकों को उनके पैसे वापस नहीं मिल जाते, वह उनके हितों की रक्षा करती रहेंगी।
भंगू ने 1980 में अपनी कंपनी की स्थापना की थी। शुरुआती वर्षों में, उन्होंने कोलकाता में नौकरी की और बाद में गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में भी काम किया, जिसने बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाया। अपने अनुभव के आधार पर, उन्होंने 1980 में पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट (PGF) नाम से कंपनी बनाई, जिसमें उन्होंने लोगों को सागौन जैसे पेड़ों में निवेश करने का लालच दिया और भारी मुनाफे का वादा किया। 1996 तक, उन्होंने करोड़ों रुपये जुटाए, लेकिन विभिन्न जांचों के कारण उनकी कंपनी बंद हो गई।
भंगू ने इसके बाद पंजाब के बरनाला में पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PACL) की स्थापना की, जिसमें एक चेन सिस्टम स्कीम शुरू की गई। उनके वादों और बड़े मुनाफे के लालच में, 5 करोड़ से अधिक लोगों ने इस स्कीम में पैसा लगाया। पर्ल ग्रुप के विरुद्ध चल रही यह जांच न केवल निवेशकों के अधिकारों की रक्षा करने का प्रयास कर रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि ऐसे बड़े घोटालों को भविष्य में रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।