गोरखपुर में एक मस्जिद के विध्वंस को लेकर चल रहे विवाद ने स्थानीय समुदाय को गहरे संकट में डाल दिया है। शुऐब अहमद, जो मस्जिद के मुतवल्ली रहे सुहेल अहमद के बेटे हैं, ने हाल ही में कहा कि पिछले साल रात में नगर निगम ने 1200 वर्ग फीट की मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद नगर निगम ने उन्हें 520 वर्ग फीट जमीन पर मस्जिद बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे कमेटी ने स्वीकार किया। लेकिन अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) इस निर्माण को अवैध बता रहा है और इसे तोड़ने की धमकी दे रहा है। शुऐब ने बताया कि उन्होंने 17 फरवरी को कमिश्नर कोर्ट में स्टे के लिए अर्जी दाखिल की थी और 25 फरवरी को वे अपने पक्ष की दलील देंगे।
मस्जिद कमेटी का कहना है कि यह स्थान 20492 वर्ग फीट का है और इसके बीचों-बीच पहले से एक मस्जिद विद्यमान थी। नगर निगम ने जनवरी 2024 में इस ढांचे को ढहा दिया, जिससे कमीशन और जनहित में आपत्ति दर्ज की गई। इसके पश्चात नगर निगम के बोर्ड बैठक में सहमति बनी कि उन्हें 520 वर्ग फीट दक्षिणी कोने में दी जाएगी, जिस पर चार मंजिला मस्जिद का निर्माण किया गया है। हालांकि, GDA अब इसे अवैध बताने का प्रयास कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भूमि पिछले 40 वर्षों से अतिक्रमण का शिकार रही है, जहां कई अस्थाई निर्माण किए गए थे। मुस्लिम समुदाय ने यहां एक मस्जिद का निर्माण भी किया था। नगर निगम ने 22 जनवरी 2024 को क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का कार्य शुरू किया था, लेकिन मस्जिद को रात में ध्वस्त किया गया, जिसमें कोई बड़ी प्रशासनिक प्रतिक्रिया नहीं हुई।
इस विवाद लंबे समय से चल रहा है क्योंकि 1967 में भी नगर निगम ने मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई का प्रयास किया था, लेकिन तब कोर्ट ने मस्जिद के लिए 1284 वर्ग फीट जमीन देने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने मस्जिद के लिए भूमि का आवंटन किया। अब मस्जिद कमेटी का कहना है कि निर्माण उनके पास विधिवत अनुमति और नगर निगम की सहमति के अनुसार हुआ है, जबकि GDA का कहना है कि निर्माण मानचित्र मान्य नहीं था और इसलिए इसे अवैध करार दिया जा रहा है।
मुस्लिम समुदाय के कुछ नेता जैसे मौलाना अब्दुल हमीद ने कहा है कि अगर मस्जिद को ध्वस्त किया गया, तो यह उनके लिए एक गंभीर धार्मिक प्रवृत्ति का उल्लंघन होगा। वहीं, कांग्रेस के नेता तौकीर आलम ने भी इस मसले को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता की आलोचना की।
GDA ने जो नोटिस जारी किया है, उसमें कहा गया है कि 15 मई, 2024 को मस्जिद के निर्माण को रोकने का आदेश दिया गया था। हालांकि, मस्जिद कमेटी ने अपनी दलील दी है कि 100 वर्ग मीटर से कम के भूखंड पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराना अनिवार्य नहीं है। इसके तहत आर्किटेक्ट मनीष मिश्र ने भी उल्लेख किया है कि पुराने क्षेत्रों में यह नियम मान्य हैं।
अब इस पूरे विवाद के केंद्र में मस्जिद के निर्माण की वैधता और संबंधित कानूनी मुद्दे हैं। स्थानीय निवासी और समुदाय के सदस्य चाहते हैं कि न्यायालय से सही निर्णय आए ताकि उनकी धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इस मामले की सुनवाई 25 फरवरी को प्रस्तावित है, जहां सभी पक्ष अपनी बात रखेंगे।