लखनऊ में हुए शान-ए-अवध कार्यक्रम ने काशी की प्राचीन साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। गोमतीनगर संगीत नाटक अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और साहित्य, संगीत, और कला के विभिन्न पहलुओं का आनंद लिया।
कार्यक्रम के आयोजक बृजेश ने बताया कि इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों, शायरों, कथाकारों, लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। इनमें लेखिका पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह, मेजर जनरल ए.के.चतुर्वेदी, वरिष्ठ कथाकार अखिलेश, ‘किस्सा किस्सा लखनऊवा’ के लेखक हिमांशु वाजपेयी, और कवि आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम शामिल थे। इन सभी को सम्मानित किया गया और उनके योगदान को सराहा गया।
बृजेश ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देना और युवा लेखकों और कलाकारों को मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि आजकल बहुत सारे युवा लेखक हैं जो अच्छी कविताएं लिखते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करके हम युवाओं के हुनर को पंख देने और उन्हें हौसला प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान ‘एक दिन की छुट्टी’ नाटक का मंचन भी हुआ, जिसका उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि जीवन में छुट्टी कितनी जरूरी है। नाटक में दिखाया गया कि काम के साथ शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए छुट्टी लेना आवश्यक है। यह नाटक लोगों को जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें अपने जीवन में संतुलन बनाने की आवश्यकता को समझने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, शान-ए-अवध कार्यक्रम एक सफल आयोजन था जिसने लोगों को संस्कृति, साहित्य, और कला के विभिन्न पहलुओं का आनंद लेने का अवसर प्रदान किया। यह कार्यक्रम युवा लेखकों और कलाकारों को मंच प्रदान करने और उन्हें हौसला प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है।