कानपुर के दुर्गापुर गांव में रहने वाले जवान पवन यादव की जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में सेना के ट्रक खाई में गिरने के कारण मौत हो गई। पवन यादव के पिता सतेंद्र यादव ने बताया कि मौत की खबर आने के चंद घंटे पहले ही उन्होंने अपने बेटे को फोन किया था। पवन यादव ने बताया था कि वह खिचड़ी पर छुट्टी लेकर घर आ रहे हैं और अम्मा की तबीयत कैसी है? इस पर सतेंद्र यादव ने कहा था कि यहां सब ठीक है। इसके बाद पवन यादव ने कहा था कि अच्छा बाबूजी बाद में बात करता हूं, मैं ड्यूटी पर हूं। सतेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें क्या पता था कि यह उनके कलेजे के टुकड़े से आखिरी बार बात हो रही है।
पवन यादव की मौत की खबर परिवार को लगी तो कोहराम मच गया। मां और पत्नी बेसुध हो गईं। पिता सतेंद्र यादव को तो एक पल को विश्वास ही नहीं हुआ। वह कभी फोन पर बेटे की तस्वीर देखते तो कभी उस तस्वीर को चूमते हुए सीने से लगाकर जोर-जोर से रोने लगते। दादा को रोते देख उनके पोता-पोती तेजस और तनवी भी उनसे लिपट कर रोने लगते हैं।
पवन यादव तमिल बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। वह हाल ही में छुट्टी बिताकर कश्मीर लौटे थे। 2 दिसंबर को उन्होंने अपने बेटे का जन्मदिन मनाया था। शनिवार को उनकी मौत की खबर आई। घर वालों ने बताया कि कुछ महीने बाद पवन यादव का रिटायरमेंट होना था। वह मंधना में घर बनाकर परिवार के साथ रहने की प्लानिंग कर रहे थे। बहू को नौकरी मिली तो उसे भी देश सेवा में भेजेंगे।
पवन यादव के भाई पारस ने बताया कि भाई ने 2009 में सेना जॉइन की थी। मौजूदा समय में वह हवलदार के पद पर तैनात थे। बड़े भाई पवन यादव को 15 जनवरी को घर आना था। 4 महीने बाद ही उनका रिटायरमेंट भी होना था। इससे परिवार के लोगों में खुशी थी कि अब पवन घर-परिवार के साथ रहेंगे। पिता सतेंद्र यादव का कहना है कि बहू सुषमा काे सेना में नौकरी का मौका मिला, तो वह भी सेना जॉइन करके देश सेवा करेगी।
पवन की 3 साल पहले प्रयागराज में पोस्टिंग थी। इसके चलते पत्नी सुषमा, दोनों बच्चे तेजस (12) और तनवी (6) प्रयागराज में ही रहते हैं। जबकि दो भाई पारस और नीलेंद्र यादव का परिवार मां गोमती और पिता सतेंद्र के साथ रहता है। पवन की मौत की जानकारी मिलते ही कानपुर से पवन के भाई प्रयागराज पहुंचे। पवन की पत्नी और बच्चों को लेकर कानपुर पहुंचे। उन्होंने भाभी और बच्चों को पहले कुछ नहीं बताया। लेकिन, जैसे ही गांव के बाहर पहुंचे तो एकदम से जोर से चीख पड़े। बोले- भाभी भइया नहीं रहे। यह सुनते ही सुषमा के कदम रुक गए। उसे विश्वास नहीं हुआ। लेकिन, गांव से रोने की आवाज सुनकर वो भी जोर-जोर से रोने लगी।
सुषमा घर के सामने पहुंची तो रोते हुए सास गोमती से लिपट गई। बच्चे भी दौड़कर दादा से चिपक कर रोने लगे। इसके बाद बच्चे अंदर गए तो वहां अपनी मां के सीने से लगकर रोने लगे। सुषमा बार-बार बेहोश हो रही थी। वह कभी बच्चों को देखकर रोती, तो कभी पवन की तस्वीर को सीने से लगाकर रोती।
कोहरे के चलते जम्मू से फ्लाइट नहीं आ सकी। सेना के अधिकारियों से बात हुई है। उन्होंने बताया है कि सोमवार दोपहर 12 बजे तक विशेष विमान से भाई का पार्थिव शरीर कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट पहुंचेगा। गांव में शहीद पवन यादव को श्रद्धांजलि देने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे हैं। आर्यनगर के सपा विधायक अमिताभ बाजपेई और सपा जिलाध्यक्ष मुनींद्र शुक्ला भी परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। परिवार और गांव के लोगों ने पवन के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी हैं। एसडीएम समेत कई अफसर भी घर पहुंचे।
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में शनिवार दोपहर सेना का ट्रक खाई में गिर गया था। बताया जा रहा है कि फिसलन के कारण सेना का एक ट्रक पहाड़ी से नीचे खाई में गिरा। इस हादसे में 4 जवानों की मौत हो गई, जबकि 6 घायल हो गए। हादसे में कानपुर शिवराजपुर थाना क्षेत्र के दुर्गापुर गांव में रहने वाले जवान पवन यादव की भी मौत हो गई।