तिहाड़ में केजरीवाल को अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की नहीं मिली इजाजत

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– केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए

– एम्स के डायरेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की मांग खारिज कर दी है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने कहा कि केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट ने केजरीवाल को विशेष इलाज की जरूरत होने पर एम्स के डायरेक्टर की ओर से मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल को इंसुलिन दी जाए या नहीं, इस पर फैसला मेडिकल बोर्ड करेगा। अरविंद केजरीवाल की डाइट भी यही मेडिकल बोर्ड तय करेगा। अरविंद केजरीवाल किस तरह का व्यायाम करेंगे यह भी मेडिकल बोर्ड तय करेगा। मेडिकल बोर्ड में वरिष्ठ एंडोक्रिनोलोजिस्ट और मधुमेह रोग विशेषज्ञ होंगे।

कोर्ट ने 19 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केजरीवाल के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करने के संकेत दिए थे। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि केजरीवाल को शुगर की बीमारी है और इसके लिए उन्हें इंसुलिन की जरूरत होती है। सिंघवी ने कोर्ट को केजरीवाल के शुगर लेवल का चार्ट दिखाया।

सिंघवी ने कहा था कि आज तक हमने किसी को आम खाने की शिकायत करते नहीं सुना। केजरीवाल को 48 बार घर का खाना दिया गया, जिसमें तीन बार आम भेजा गया। उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन और ईडी की मिलीभगत से केजरीवाल का मीडिया ट्रायल किया जा रहा है कि आम और मिठाई खाकर अपना शुगर लेवल बढ़ाना चाहते हैं, ताकि स्वास्थ्य के आधार पर जमानत का आधार बनाया जा सके। उन्होंने कहा था कि ईडी किस तरह राजनीति पर उतर आई है कि वो ये सब सवाल खड़ी कर रही है।

सिंघवी ने कहा था कि जेल अधीक्षक केजरीवाल के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराएं। उन्होंने कहा था कि जेल में कैदी होने का ये मतलब नहीं है कि स्वास्थ्य का कोई अधिकार नहीं है। क्या केजरीवाल गैंगस्टर हैं या हार्डकोर अपराधी हैं कि उन्हें 15 मिनट अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सलाह नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि 75 साल के लोकतंत्र में ऐसी स्थिति कभी नहीं आई।

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने केजरीवाल के डाइट को लेकर कोर्ट में रिपोर्ट जमा कराई थी। जेल प्रशासन ने कहा कि केजरीवाल को घर से बना खाना देने में कोई शर्त नहीं थी कि वह फल या कुछ भी खा सकते हैं। जेल प्रशासन ने कहा कि वह डाइट फॉलो नहीं कर रहे हैं और एम्स के मुताबिक उन्हें आम से परहेज करना चाहिए था। जेल मैनुअल के अनुसार घर का बना खाना कैदी को नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने केजरीवाल के वकील से कहा कि जब 1 अप्रैल को घर का बना खाने की इजाजत दी गई थी तो उस समय दिए गए डाइट चार्ट को फॉलो करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि आपके डाइट चार्ट और जेल की ओर से दिए गए डाइट चार्ट को देख कर ऐसा लगता है कि उसमें कुछ बदलाव हुआ है। कोर्ट ने 18 अप्रैल को केजरीवाल के शुगर लेवल की नियमित जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए तिहाड़ जेल से केजरीवाल का डाइट चार्ट तलब किया था।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/संजीव/सुनीत

समरससमरससमरसहिस

High

HLEG 10

तिहाड़ में केजरीवाल को अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की नहीं मिली इजाजत

Court dismisses plea of Arvind Kejriwal for VC consultation.

– केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए

– एम्स के डायरेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की मांग खारिज कर दी है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने कहा कि केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट ने केजरीवाल को विशेष इलाज की जरूरत होने पर एम्स के डायरेक्टर की ओर से मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल को इंसुलिन दी जाए या नहीं, इस पर फैसला मेडिकल बोर्ड करेगा। अरविंद केजरीवाल की डाइट भी यही मेडिकल बोर्ड तय करेगा। अरविंद केजरीवाल किस तरह का व्यायाम करेंगे यह भी मेडिकल बोर्ड तय करेगा। मेडिकल बोर्ड में वरिष्ठ एंडोक्रिनोलोजिस्ट और मधुमेह रोग विशेषज्ञ होंगे।

कोर्ट ने 19 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केजरीवाल के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करने के संकेत दिए थे। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि केजरीवाल को शुगर की बीमारी है और इसके लिए उन्हें इंसुलिन की जरूरत होती है। सिंघवी ने कोर्ट को केजरीवाल के शुगर लेवल का चार्ट दिखाया।

सिंघवी ने कहा था कि आज तक हमने किसी को आम खाने की शिकायत करते नहीं सुना। केजरीवाल को 48 बार घर का खाना दिया गया, जिसमें तीन बार आम भेजा गया। उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन और ईडी की मिलीभगत से केजरीवाल का मीडिया ट्रायल किया जा रहा है कि आम और मिठाई खाकर अपना शुगर लेवल बढ़ाना चाहते हैं, ताकि स्वास्थ्य के आधार पर जमानत का आधार बनाया जा सके। उन्होंने कहा था कि ईडी किस तरह राजनीति पर उतर आई है कि वो ये सब सवाल खड़ी कर रही है।

सिंघवी ने कहा था कि जेल अधीक्षक केजरीवाल के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराएं। उन्होंने कहा था कि जेल में कैदी होने का ये मतलब नहीं है कि स्वास्थ्य का कोई अधिकार नहीं है। क्या केजरीवाल गैंगस्टर हैं या हार्डकोर अपराधी हैं कि उन्हें 15 मिनट अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सलाह नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि 75 साल के लोकतंत्र में ऐसी स्थिति कभी नहीं आई।

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने केजरीवाल के डाइट को लेकर कोर्ट में रिपोर्ट जमा कराई थी। जेल प्रशासन ने कहा कि केजरीवाल को घर से बना खाना देने में कोई शर्त नहीं थी कि वह फल या कुछ भी खा सकते हैं। जेल प्रशासन ने कहा कि वह डाइट फॉलो नहीं कर रहे हैं और एम्स के मुताबिक उन्हें आम से परहेज करना चाहिए था। जेल मैनुअल के अनुसार घर का बना खाना कैदी को नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने केजरीवाल के वकील से कहा कि जब 1 अप्रैल को घर का बना खाने की इजाजत दी गई थी तो उस समय दिए गए डाइट चार्ट को फॉलो करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि आपके डाइट चार्ट और जेल की ओर से दिए गए डाइट चार्ट को देख कर ऐसा लगता है कि उसमें कुछ बदलाव हुआ है। कोर्ट ने 18 अप्रैल को केजरीवाल के शुगर लेवल की नियमित जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए तिहाड़ जेल से केजरीवाल का डाइट चार्ट तलब किया था।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/संजीव/सुनीत

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तिहाड़ में केजरीवाल को अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की नहीं मिली इजाजत

Court dismisses plea of Arvind Kejriwal for VC consultation.

– केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए

– एम्स के डायरेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए परामर्श की मांग खारिज कर दी है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने कहा कि केजरीवाल को जेल के अंदर जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट ने केजरीवाल को विशेष इलाज की जरूरत होने पर एम्स के डायरेक्टर की ओर से मेडिकल बोर्ड गठित करने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल को इंसुलिन दी जाए या नहीं, इस पर फैसला मेडिकल बोर्ड करेगा। अरविंद केजरीवाल की डाइट भी यही मेडिकल बोर्ड तय करेगा। अरविंद केजरीवाल किस तरह का व्यायाम करेंगे यह भी मेडिकल बोर्ड तय करेगा। मेडिकल बोर्ड में वरिष्ठ एंडोक्रिनोलोजिस्ट और मधुमेह रोग विशेषज्ञ होंगे।

कोर्ट ने 19 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केजरीवाल के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करने के संकेत दिए थे। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि केजरीवाल को शुगर की बीमारी है और इसके लिए उन्हें इंसुलिन की जरूरत होती है। सिंघवी ने कोर्ट को केजरीवाल के शुगर लेवल का चार्ट दिखाया।

सिंघवी ने कहा था कि आज तक हमने किसी को आम खाने की शिकायत करते नहीं सुना। केजरीवाल को 48 बार घर का खाना दिया गया, जिसमें तीन बार आम भेजा गया। उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन और ईडी की मिलीभगत से केजरीवाल का मीडिया ट्रायल किया जा रहा है कि आम और मिठाई खाकर अपना शुगर लेवल बढ़ाना चाहते हैं, ताकि स्वास्थ्य के आधार पर जमानत का आधार बनाया जा सके। उन्होंने कहा था कि ईडी किस तरह राजनीति पर उतर आई है कि वो ये सब सवाल खड़ी कर रही है।

सिंघवी ने कहा था कि जेल अधीक्षक केजरीवाल के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराएं। उन्होंने कहा था कि जेल में कैदी होने का ये मतलब नहीं है कि स्वास्थ्य का कोई अधिकार नहीं है। क्या केजरीवाल गैंगस्टर हैं या हार्डकोर अपराधी हैं कि उन्हें 15 मिनट अपने डॉक्टर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सलाह नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि 75 साल के लोकतंत्र में ऐसी स्थिति कभी नहीं आई।

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने केजरीवाल के डाइट को लेकर कोर्ट में रिपोर्ट जमा कराई थी। जेल प्रशासन ने कहा कि केजरीवाल को घर से बना खाना देने में कोई शर्त नहीं थी कि वह फल या कुछ भी खा सकते हैं। जेल प्रशासन ने कहा कि वह डाइट फॉलो नहीं कर रहे हैं और एम्स के मुताबिक उन्हें आम से परहेज करना चाहिए था। जेल मैनुअल के अनुसार घर का बना खाना कैदी को नहीं दिया जा सकता है।

कोर्ट ने केजरीवाल के वकील से कहा कि जब 1 अप्रैल को घर का बना खाने की इजाजत दी गई थी तो उस समय दिए गए डाइट चार्ट को फॉलो करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि आपके डाइट चार्ट और जेल की ओर से दिए गए डाइट चार्ट को देख कर ऐसा लगता है कि उसमें कुछ बदलाव हुआ है। कोर्ट ने 18 अप्रैल को केजरीवाल के शुगर लेवल की नियमित जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए तिहाड़ जेल से केजरीवाल का डाइट चार्ट तलब किया था।