‘बड़े भाई साहब’ और ‘दाज्यू’ का हुआ मंचन

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12HREG185 ‘बड़े भाई साहब’ और ‘दाज्यू’ का हुआ मंचन

नैनीताल, 12 नवंबर (हि.स.)। रचनात्मक शिक्षक मण्डल उत्तराखण्ड की पहल पर सांस्कृतिक टीम ‘उज्यावक दगड़ी’ यानी उजाले के साथी रामनगर के तत्वावधान में शनिवार को मुख्यालय के भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ व शेखर जोशी की कहानी ‘दाज्यू’ का मंचन किया गया।

उत्तराखंडी मूल के प्रसिद्ध लेखक युवा नाट्यकर्मी ललित बिष्ट द्वारा निर्देशित इन नाटकों में सुमित कुमार, जतिन राजपूत, रोहित खत्री, अर्जुन नेगी, शीतल कश्यप, कशिश, महक अंसारी आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। इससे पूर्व ज्योति फर्त्याल, प्राची बंगारी, हिमानी बंगारी, आकांक्षा सुंदरियाल ने गत दिवस उत्तराखंड गौरव सम्मान प्राप्त करने वाले प्रदेश के दिवंगत जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के गीत ‘उत्तराखण्ड मेरी मातृभूमि’ सहित वीरेन डंगवाल, बल्ली सिंह चीमा व जहूर आलम के गीत प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य एडवोकेट कैलाश जोशी, शिक्षक मण्डल के संयोजक नवेन्दु मठपाल, विद्यालय के प्रधानाचार्य बिशन सिंह मेहता, प्रवीण सती, आलोक कुमार, डॉ. प्रह्लाद, डॉ. नीलम जोशी, डॉ. रेनू बिष्ट, मो. शाहनवाज व गोबिंद बोरा मौजूद रहे।उल्लेखनीय है कि कुमाउनी भाषा में दाज्यू शब्द को बड़े भाई साहब के लिए ही प्रयोग किया जाता है।

गौरतलब है कि प्रेमचंद लिखित ‘बड़े भाई साहब’ कहानी भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को व्यंगात्मक तरीके से सामने रखती है। जबकि शेखर जोशी की कहानी दाज्यू किसी बड़े शहर में एक ढाबे में नौकरी करने वाले बच्चे के अपने इलाके के एक ग्राहक से दाज्यू यानी बड़े भाई का भावनात्मक रिश्ता बनाने की कहानी है। दोनों कहानियां बाल मनोविज्ञान को बहुत ही बेहतरीन तरीके से सामने रखती हैं।