एबीवीपी सिर्फ छात्र संगठन ही नहीं, राष्ट्रीय आन्दोलन का प्रतीक: राजकुमार

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– संपूर्ण राष्ट्रीय आन्दोलन का प्रतीक एबीवीपी

लखनऊ, 09 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्र पुनर्निर्माण के लक्ष्य को लेकर अभाविप ने अपने अविस्मरणीय, अद्भुत और ऐतिहासिक 74 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। अभाविप अब अपने 75 वें वर्ष में प्रवेश कर गयी है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना 09 जुलाई 1949 को हुई। वर्षों की कठोर तपस्या और संघर्ष से यह संगठन आज विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। अभाविप ने शिक्षा जगत के साथ-साथ समाज जीवन के हर क्षेत्र में रचनात्मक कार्य प्रारम्भ किया है। दलगत भावना से अलग रहते हुए युवा शक्ति के समग्र उत्थान के लिए कार्यरत है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रान्त संगठन मंत्री साधक राजकुमार ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि एबीवीपी केवल छात्र संगठन ही नहीं अपितु संपूर्ण राष्ट्रीय आन्दोलन का प्रतीक है। एबीवीपी समाज के सभी क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर समृद्ध स्वराज्य की ओर ले जाने का देश के युवाओं का प्रयत्न है।

उन्होंने बताया कि विद्यार्थी परिषद की मान्यता है कि छात्र कल का नहीं अपितु आज का नागरिक है। छात्र केवल शैक्षिक गतिविधियों का अंग ही नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र का एक जिम्मेदार नागरिक है। छात्र शक्ति समस्या नहीं समाधान है। परिषद का यह प्रयास रहता है कि छात्र देश की लोक शिक्षा लोक सेवा एवं समाज जीवन के हर क्षेत्र में पुनरुत्थान का वाहक बने। यह परिषद की असीम उपलब्धि रही है कि युवा शक्ति को ऐसा छात्र संगठन दिया जो वर्षों के सकारात्मक संघर्ष की भूमि पर खड़ा हुआ है।

आपातकाल में रही एबीवीपी की प्रभावी भूमिका

एबीवीपी 1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा ऐसे समय में विद्यार्थी परिषद ने देशभर में आन्दोलन खड़ा किया। बिहार में छात्र युवा संघर्ष समिति का नेतृत्व परिषद के कार्यकर्ताओं ने किया। छात्र आन्दोलन के प्रभाव के कारण ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सत्ता के विरूद्ध संघर्ष के लिए आन्दोलन का नेतृत्व करने को तैयार हुए। आपातकाल हटने के बाद जनता पार्टी के गठन और 1977 के चुनाव में भी एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई, लेकिन जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद अपने को सत्ता से दूर रखा।

एबीवीपी अवध प्रान्त के संगठन मंत्री अंशुल श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यार्थी परिषद शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन करती है। इसके अलावा राष्ट्र के समक्ष गंभीर चुनौतियों के प्रति समाज जागरण का काम करती है। बांग्लादेशी घुसपैठ, आतंकवाद,नक्सली हिंसा, राष्ट्र विरोधी क्रियाकलाप अलगाववादी गतिविधियों तथा कश्मीर जैसी चुनौतियों को लेकर संपूर्ण समाज में जागरण एवं आंदोलन का नेतृत्व एबीवीपी ने किया। आज यह संगठन संस्कारित युवा शक्ति का प्रतीक बन गया है।

अंशुल श्रीवास्तव ने बताया कि एबीवीपी आज अपने आयामों व गतिविधियों के माध्यम से भी देश समाज व छात्र हित में कार्य कर रहा है। परिषद के कार्यकर्ता थिंक इण्डिया एग्रीविजन,फार्माविजन, मेडीविजन,एसएफडी व राष्ट्रीय कलामंच के माध्यम से कार्य कर रहे हैं।