लुधियाना अस्पताल में भाजपा नेता का बवाल: डॉक्टर से बहस, मरीज को ‘बेटा’ कहने पर विवाद।

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पंजाब के लुधियाना में स्थित सिविल अस्पताल में भाजपा नेता द्वारा खड़ा किया गया हंगामा ने वहां के माहौल को गरमा दिया है। यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब एक लेडी डॉक्टर ने एक मरीज के लिए पर्चा बनाने का काम किया, जिसमें मरीज के पति का व्यवहार अस्वीकृत करने लायक था। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मरीज के पति को ‘बेटा’ कहकर संबोधित किया, तो वह भड़क गए और गाली-गलौच करने लगे। वहीं, भाजपा नेता ने इस मामले में डॉक्टर के प्रति बदतमीजी के आरोप भी लगाए हैं।

डॉ. सुनीता अग्रवाल, जो इस पूरी घटना में मुख्य किरदार निभा रही हैं, ने बताया कि विवाद उस समय शुरू हुआ जब उन्होंने कमलेश नामक मरीज को सिर की चोट के उपचार के लिए पर्चा दिया। मरीज के पति राजकुमार ने अपने लिए अलग पर्चा न बनवाने का निर्णय लिया, लेकिन बाद में वह रात करीब 9 बजे कुछ लोगों के साथ अस्पताल लौटे और अपने लिए पर्चा कटवाने का दबाव बनाने लगे। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने राजकुमार को समझाया कि यदि आवश्यक हो तो वह एक्सरे या सीटी स्कैन की सलाह दे सकती हैं, लेकिन वे आराम से बैठें। यह सुनकर राजकुमार और उनके साथी भड़क गए और डॉक्टर पर अपशब्दों का प्रयोग करने लगे।

घटना के बाद डॉ. सुनीता अग्रवाल ने अस्पताल के SMO को एक आधिकारिक शिकायत दी, जिसमें उन्होंने भाजपा नेता विक्की साहोता और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें गाली-गलौच से अपमानित किया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, भाजपा नेता साहोता ने अपनी सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो में कहा कि डॉक्टर का मरीज के प्रति बर्ताव बिल्कुल अनुचित था और इसलिए वे SMO के पास जाकर डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगे।

इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय चौकी इंचार्ज रेशम ने कहा कि घटना के स्थल की सीसीटीवी फुटेज जांची जाएगी। इसके माध्यम से जो भी लोग गाली-गलौच करते हुए नजर आएंगे, उन्हें पुलिस चौकी बुलाया जाएगा ताकि इस मामले की स्पष्टता बनी रहे। जांच के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला न केवल एक अस्पताल के भीतर के माहौल को दर्शाता है, बल्कि यह भी इंगित करता है कि स्वास्थ्य सेवाएं और मरीजों के साथ संवाद करने का ढंग कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संयम से काम लेना चाहिए ताकि चिकित्सा सेवाएं प्रभावित न हों और शांति बनी रहे।