**सिख धर्म में बढ़ रहा है आक्रोश: दमदमी टकसाल के मुखी ने माफी का किया विरोध**
पंजाब के अमृतसर में दमदमी टकसाल के मुखी अमरीक सिंह अजनाला ने रविवार को अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष सुखबीर बादल को माफी देने के फैसले का कड़ा विरोध किया। इस दौरान उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह, ज्ञानी हरप्रीत सिंह और ज्ञानी सुल्तान सिंह के पुतले भी जलाए। अमरीक सिंह का कहना है कि ये जत्थेदार सुखबीर बादल और उनके साथियों को माफ करके एक गंभीर गलती कर रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ़ की गईं कार्रवाइयाँ किसी भी सूरत में माफी के योग्य नहीं हैं।
अमरीक सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि यह माफी सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। उन्होंने खुलासा किया कि सरकारी तंत्र ने बार-बार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों को अनदेखा किया और आरोपियों की रक्षा का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल और उनके सहयोगियों ने 9 साल तक अपने अपराधों को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन हाल ही में उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब में अपने गुनाहों को कबूल किया।
मुखी अमरीक सिंह ने पंजाब के लोगों से अपील की है कि वे अपने-अपने शहरों में इस प्रकार की माफी के विरोध में आवाज उठाएं और सिख परंपराओं के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की बेअदबी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो कि सिख समाज के लिए सीधे-link धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जुड़ा हुआ है।
यह घटना सिख समुदाय में उभरते आक्रोश को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। अमरीक सिंह के नेतृत्व में किए गए विरोध प्रदर्शन ने सिख इतिहास और धार्मिक मान्यताओं की रक्षा के लिए सिखों की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को लेकर केवल मौन रहना ही समाधान नहीं है बल्कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारी आवाज सुनी जाए और हमारी परंपराएं सुरक्षित रहें।
इस प्रकार, माफी देने के इस अप्रत्याशित निर्णय ने न केवल विभाजन की भावना को बढ़ाया है बल्कि सिख समुदाय की एकता और उनके धार्मिक आदर्शों को भी चुनौती दी है। पंजाब में इस विरोध के बाद स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, और यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में सिख समाज अपने अधिकारों और मूल्यों की रक्षा के लिए और भी मुखर होगा।