लुधियाना के बीआरएस नगर में स्थित शीतला माता मंदिर में चोरी की घटना ने शहर में आक्रोश पैदा कर दिया है। तीन दिन पहले हुई इस चोरी में अज्ञात चोरों ने मंदिर के अंदर से लगभग 40 किलो चांदी के आभूषण चुरा लिए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपए है। बताएं कि इस मामले में सीसीटीवी कैमरे में दो संदिग्ध व्यक्तियों को चोरी किए गए सामान के साथ मंदिर से बाहर जाते हुए देखा गया है। मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष अशोक सच्चर ने बताया कि चोरों ने मंदिर में स्थापित सभी चांदी के गहने ले उड़े, जिससे धार्मिक समुदाय में गहरा नुकसान हुआ है।
शुक्रवार को इस चोरी की घटना के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया और अपनी नाराजगी व्यक्त की। शिवसेना नेता राजीव टंडन के नेतृत्व में मंदिर समिति के सदस्य पुलिस कमिश्नर के साथ मुलाकात करने पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। टंडन ने यह भी टिप्पणी की कि शहर की कानून-व्यवस्था लगातार deteriorate हो रही है, और यह अत्यंत चिंताजनक है कि अब भगवान के घर भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस चोरी को धार्मिक स्थानों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया।
इस मामले का संज्ञान लेते हुए, डीसीपी शुभम अगरवाल ने आश्वासन दिया है कि पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पुलिस जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का प्रयास कर रही है। डीसीपी के अनुसार, यह घटना न केवल एक चोरी है बल्कि धार्मिक मान्यता और सुरक्षा को चुनौती भी देती है। पुलिस विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का वचन दिया है कि ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की जाए।
हालांकि, मंदिर में हुई इस चोरी ने स्थानीय समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इसके साथ ही, मंदिर प्रशासन ने भी ऐसी घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उन्हें अपने पूजा स्थलों पर आत्मविश्वास और शांति के साथ जाने का मौका मिले।
ज्ञात हो कि यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है। लोग सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसी घटनाओं के खिलाफ एक साथ आते हुए, शहरी और ग्रामीण दोनों समुदायों के लोग सुरक्षा और शांति की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि समाज को एकजुट होकर अपने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रयास करना आवश्यक है।