फरीदकोट में रोडवेज कर्मियों की 3 दिवसीय हड़ताल, 110 रूट ठप! सरकार पर रोष!

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पंजाब में रोडवेज बस कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर तीन दिनों के लिए हड़ताल की दुकान की है, जिसके कारण सोमवार को फरीदकोट में सभी बसें बस स्टैंड पर खड़ी रहीं। इस आंदोलन में पंजाब रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। फरीदकोट डिपो की हड़ताल का सीधा असर लगभग 110 रूटों पर पड़ने की संभावना है। इन कर्मचारियों का आरोप है कि वे अपनी सेवाओं को स्थायी करने का प्रयास लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। इसी असंतोष के चलते उन्होंने यह हड़ताल का फैसला लिया।

उक्त मौके पर बात करते हुए यूनियन के डिपो प्रधान हरदीप सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता ने राज्य में सरकार बनने से पूर्व वादा किया था कि सभी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के स्थायी किया जाएगा। लेकिन सरकार के गठन के बाद अब तक न ही किसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी की सुध ली गई और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया गया। इसी वजह से कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल पर हैं। यूनियन के अनुसार, सरकार ने स्थायीकरण का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप उन्हें हड़ताल की राह अपनानी पड़ी।

प्रदेश के नेता हरप्रीत सिंह सोढ़ी ने बताया कि पिछले वर्ष 1 जुलाई को मुख्यमंत्री ने यूनियन के साथ एक पैनल मीटिंग आयोजित की थी। इस मीटिंग में उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए एक महीने का वक्त मांगा था। हालांकि, अब तक छह महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए कर्मचारियों की मजबूरी उन्हें हड़ताल की ओर ले जा रही है। उन्होंने हड़ताल के कारण आम जनता को होने वाली कठिनाइयों के लिए खेद व्यक्त किया है।

इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ता हैं। बड़ी संख्या में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस स्टैंड पर खड़े एक यात्री ने बताया कि खासकर महिलाओं को इस हड़ताल के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मार्गों पर केवल सरकारी बसे ही संचालित होती हैं, जिसके कारण आम लोगों की आवाजाही में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो गई हैं।

इस प्रकार, पंजाब के रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। जब तक सरकार इस समस्या का समाधान नहीं करती, तब तक यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि सरकार अगले कदम उठाते हुए कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान दे और उनकी स्थिति में सुधार करे।