रीवा के टीआरएस कॉलेज में नाैक की टीम का आगमन और उसकी ग्रेडिंग तेज़ी से बहस का विषय बन गया है। शिंखवटी छात्र संगठन टीआरएस कॉलेज और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रबंधन पर हैवानों के समान आरोप लगा रहे हैं, यह कहते हुए कि कॉलेज को ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए सिर्फ़ आलसी प्रयास हो रहा है और छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
एनएसयूआई के रविवार को की गई प्रेसवार्ता में जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने यह दावा किया कि कॉलेज को ग्रेडिंग मिलने ही से पहले औपचारिक सजावट और पेंट-पॉलिश से को सजाया जा रहा है, जबकि 2 साल से पीने का पानी सही न होने और बाथरूम की अस्वच्छता जैसी गंभीर समस्याएं बरकरार हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज खेल प्रतियोगिताओं के लिए भी अन्य कॉलेजों के मैदानों का इस्तेमाल करता है। यह सब बताता है कि कॉलेज अपनी छवि सुधारने के लिए सिर्फ़ पैसे का खेल खेल रहा है।
एनएसयूआई ने टीआरएस कॉलेज में छात्रों के साथ होने वाले अन्याय को भी उजागर किया। छात्रों को लगातार फेल या प्रमोटेड किया जाता है, फिर भी बाद में उन्हें उसी विषय पर एक एटीकेटी किया जाता है। बच्चों को परीक्षा देने के बाद फीस जमा करनी पड़ती है, जबकि कोई उचित शासन नहीं है। इस दौरान बीबीए विभाग की कक्षाएं पिछले 1.5 महीने से नहीं चल रही हैं और ऑनलाइन कक्षा का लाभ छात्रों को नहीं मिल रहा है।
छात्र संगठन ने कॉलेज में बाहरी तत्वों के घुसपैठ की भी चिंता जताई, जो छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। छात्रों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आई कार्ड उपलब्ध कराना चाहिए।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय पर भी आरोप लगाए गए हैं। एनएसयूआई ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी परीक्षा परिणामों में 80% से ज्यादा छात्रों को फेल या प्रमोटेड किया जाता है। यह कदम रिजल्ट सुधारवाने के नाम पर छात्रों से पैसे वसूलने के बटखंड को उजागर करता है।
टीआरएस और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्र संगठन के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं पर पूरा ध्यान दिया जाता है और किसी से भी पैसे की डिमांड नहीं की जाती है। इस विवाद ने रीवा के शैक्षणिक परिदृश्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।