महाकुंभ क्षेत्र में वैदिक परम्पराओं से स्थापित की गई श्री पंचायती तपोनिधि निरंजनी अखाड़े की धर्म ध्वजा
महाकुंभ नगर,30 दिसंबर (हि.स.)। वैदिक परम्पराओं एवं विधि विधान से श्री पंचायती तपोनिधि निरंजनी अखाड़े की पवित्र भगवा धर्म ध्वजा को नागा सन्यासियों ने स्थापित किया। धर्म ध्वजा स्थापित होने के बाद अखाड़े के सभी संत इस ध्वजा के संरक्षण में रहकर एक साथ सभी को महाकुंभ क्षेत्र में पूरे माघ मास रहकर जप-तप करेंगे। यह जानकारी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविन्द्र पुरी महाराज ने दी।
इस अवसर पर तेरह अखाड़ों के प्रमुख संत एवं नागा संन्यासी, साधु उपस्थित रहे।
श्री महंत रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा निरंजनी अखाड़े का ही नहीं सनातन धर्म का प्रतीक भगवा ध्वज पूज्य है। इसी धर्म ध्वजा के नीचे अखाड़े के सभी प्रमुख संत रहकर तपस्या करेंगे।
यह धर्म ध्वजा 52 बंद है जो हमारी परम्परा के मुताबिक 51 हाथ की होती है। दस नाम में 52 मणियां होती है, उन्हीं मणियों के प्रतीक के रूप में 52 बंद लगाये जाते है। इसी धर्म ध्वजा के नीचे लाखों की संख्या में पूरा धर्म विधान का निर्वहन करते हैं। पूरे माह हमारे अखाड़े में भंडारा चलता रहेगा। मैं सनातनियों को निमंत्रण देता हूं कि विश्व के इस सबसे बड़े महापर्व में आयें और पावन अवसर पर एकजुट होकर सनातन परम्परा को करीब से देंखे और सनातन को मजबूत करें।
उन्होंने बताया कि इसकी स्थापना 860 में श्री पंचायती तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा बना। इसका मुख्यालय मायापुर हरिद्वार में है। जहां कई शिक्षण संस्था है। हमारे अखाड़े में काफी शिक्षित संत हैं। मैंने खुद पीएचडी की है।
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