सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बरनाला जिले के ब्लॉक महलकला के गांव कुरड़ की पंचायत ने विभिन्न सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सख्त नियम लागू किए हैं। पंचायत के सदस्य मानते हैं कि यदि ये नियम सभी गांवों में अपनाए जाएं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। गांव के सरपंच सुखविंदर दास ने बताया कि पंचायत ने सर्वसम्मति से नशे के कारोबार से जुड़े लोगों का सामाजिक तौर पर बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। जानकारी अनुसार, जो भी व्यक्ति नशा बेचने का काम करेगा, अगर पुलिस उसे पकड़ती है तो उसके साथ कोई समर्थन नहीं करेगा। इस निर्णय के अनुसार, नशा बेचने वाले व्यक्ति का सहयोग करने वालों का भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, चोरी करने वाले व्यक्तियों के प्रति भी पंचायत ने सख्त रुख अपनाया है। पंचायत ने सभी गांववासियों को सलाह दी है कि अगर किसी के बीच झगड़ा होता है, तो उसे पंचायत में लाया जाए और सुलझाने का प्रयास किया जाए। यदि कोई व्यक्ति पंचायत को दरकिनार करते हुए सीधे पुलिस स्टेशन से जुड़ता है, तो उसके खिलाफ भी पंचायत सख्ती बरतेगी। पंचायत ने गांव में ऊंची आवाज में साउंड सिस्टम चलाने वालों पर भी प्रतिबंध लगाया है, यह एक प्रयास है जिससे सामाजिक शांति को बनाए रखा जा सके।
गांव में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। जो लोग प्लास्टिक के लिफाफे का इस्तेमाल करके उन्हें बाहर फेंकते हैं, उन्हें समझाया जाएगा या जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत का मानना है कि इस तरह के कदमों से गांव में साफ-सफाई और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा। सरपंच सुखविंदर दास ने कहा कि जहां भी किसी तरह का विवाद होगा, उसे संवाद के माध्यम से हल करने का प्रयास किया जाएगा।
पंचायत के सदस्यों ने कहा कि सामाजिक बुराइयों, इससे नशे की समस्या, का समाधान समुदाय की सहभागिता से ही संभव है। गांव के लोग नशे से मुक्ति चाहते हैं और जो युवा नशे के जाल में फंसे हुए हैं, उनके लिए पंचायत मदद का हाथ बढ़ाएगी। ऐसे लोगों के लिए चिकित्सा संसाधन एवं सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे नशे से बाहर निकल सकें। पंचायत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नशा छोड़ने की इच्छा रखने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए पूरे गांव ने एकजुटता दिखाई है। पंचायत ने नशा बेचने वालों की पहचान करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है और उन्हें चेतावनी दी जा रही है। अगर कोई व्यक्ति नशा बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे और पंचायत की तरफ से समाज से उसका बहिष्कार किया जाएगा। यह कदम न केवल गांव बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।