चंडीगढ़ में एक दंपती के साथ हुई हिंसा के मामले में प्रशासन ने कठोर कार्रवाई करते हुए एएसआई जोगिंदर का इंटरवल रिफॉर्म बटालियन (आईआरबी) में तबादला कर दिया है। साथ ही, चौकी में तैनात सिपाही कुलदीप को निलंबित करके पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस पूरे मामले में पुलिस के उच्च अधिकारियों ने SHO सतिंदर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मामले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया और अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती।
घटना का संबंध 25 दिसंबर को सेक्टर-34 में उस वक्त हुआ, जब इमिग्रेशन कंपनी चलाने वाले गगनदीप शर्मा और उनके पति पर लवप्रीत मान ने हमला किया। आरोप है कि लवप्रीत ने गगनदीप का रास्ता रोककर उन्हें परेशान किया और पिस्टल दिखाकर डराया। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि गगनदीप मदद के लिए निकटवर्ती पुलिस चौकी गईं। लेकिन वहां मौजूद सिपाही कुलदीप ने मामले को हल्के में लिया और गगनदीप की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
इस बीच, जब गगनदीप वापस लौटीं, तो लवप्रीत ने एक बार फिर से उन पर हमला किया। इस पूरी घटना के संदर्भ में सूत्रों का कहना है कि SHO सतिंदर ने DCP जसविंदर सिंह और अन्य उच्च अधिकारियों को मामले की सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने केवल यह कहा कि मारपीट और छेड़छाड़ हुई, जबकि लवप्रीत द्वारा पिस्टल दिखाने की घटना को जानबूझकर छुपा लिया। जब यह मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा, तो तुरन्त ही सख्त कदम उठाए गए।
इस तरह के मामलों में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी हमले को गंभीरता से लें। सिपाही कुलदीप और SHO सतिंदर की लापरवाही तब सामने आई, जब दोषी की असली पहचान और उसकी कृत्य की सच्चाई बाहर आई। यह सीधे तौर पर न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि आम जनता के प्रति उनके कर्तव्यों को भी प्रस्तुत करता है।
इस पूरे मामले के चलते चंडीगढ़ में पुलिस प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं और ऐसे मामलों में त्वरित और उचित कार्रवाई की मांग बढ़ गई है। पुलिस के उच्च अधिकारियों को चाहिए कि वे इस तरह के लापरवाह बर्ताव को रोके और सुनिश्चित करें कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों। चंडीगढ़ की जनता को अब इस बात की उम्मीद है कि इस मामले में जल्दी से जल्दी न्याय मिलेगा, और पुलिस प्रशासन अपनी छवि को सुधारने की दिशा में काम करेगी।