बठिंडा में किसानों का पीएम मोदी पर प्रहार: पुतला फूंका, हरियाणा में 9 जनवरी को महापंचायत!

Share

गैर राजनीतिक संयुक्त किसान मोर्चा ने आज पंजाब बंद का आह्वान किया है, जो इस क्षेत्र में किसानों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। इस बंद का समर्थन करते हुए विभिन्न गांवों में विरोध मार्च आयोजित किए गए, जहां किसानों ने अपनी आवाज उठाई और मोदी सरकार के पुतले जलाए। बठिंडा की दाना मंडी में भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के सदस्यों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पंजाब और हरियाणा की सीमा पर संघर्ष कर रहे किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया।

बंद के दौरान, किसान संगठन ने शहर में एक रोष मार्च का आयोजन किया, जिसके तहत बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के निकट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंक दिया गया। इस आयोजन में भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के प्रदेश उपाध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने यह स्पष्ट किया कि किसान आंदोलन की बाकी मांगों को लेकर उनकी मुहिम जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं है, बल्कि पूरे समाज के विभिन्न वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।

शिंगारा सिंह मान ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ यह संघर्ष और तेज होगा, यदि उनकी बाकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। वे सभी वर्गों के लोगों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस बंद को सफल बनाने में सहयोग किया। उन्होंने शिकायती लहजे में कहा कि केंद्र सरकार हर पहलू पर हमला कर रही है और किसानों के हक में खड़े लोग ही क्षति में हैं।

किसान यूनियन ने आगे बताया कि हरियाणा में 4 जनवरी को एक महापंचायत और 9 जनवरी को पंजाब के मोगा में एक अन्य महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इन महापंचायतों का उद्देश्य किसानों की आवाज को और मजबूत करना और उनकी मांगों को प्रबलता से उठाना है। शिंगारा सिंह ने इस आंदोलन को एक बड़ा जन आक्रोश बताया और कहा कि यदि केंद्र सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं आएगा, तो किसानों का गुस्सा और भी बढ़ेगा।

कुल मिलाकर, आज का पंजाब बंद किसानों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल किसानों की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि केंद्र सरकार के प्रति एक स्पष्ट संदेश भी भेजता है कि वे अपनी मांगों के प्रति गंभीर हैं। ऐसे में, जब किसान संगठनों ने अपनी तैयारियों को लेकर स्पष्टता दिखाई है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उनकी आवाज का कितना ध्यान रखती है।