अमृतसर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 85 में से 40 सीटें जीतकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक पार्टी मेयर के नाम की घोषणा नहीं कर पाई है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा अब अमृतसर में हैं, जहां वे चुनावी नतीजों के बाद मेयर की नियुक्ति को लेकर एक बंद कमरे में बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में सफल पार्षदों के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। कांग्रेस यह दावा कर रही है कि जो भी मेयर नियुक्त होगा, वह आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि उनकी छवि ईमानदार होती है और नगर निगम की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जाता है, तो कांग्रेस को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा।
कांग्रेस की नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर भी हैं, और पार्टी के भीतर इस बात की चर्चा हो रही है कि मेयर के जरिए चुनावी रणनीति को मजबूत किया जा सके। अमृतसर के चुनावी परिणामों के बाद, जहां आम आदमी पार्टी ने 24, भारतीय जनता पार्टी ने 9 और अकाली दल ने 4 सीटें प्राप्त की हैं, कांग्रेस और AAP हाउस गठन के लिए एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं। आम आदमी पार्टी आजाद और अकाली दल के पार्षदों को अपनी ओर आकर्षित करने में लगी हुई है, जबकि कांग्रेस भी अपने पुराने और नए सदस्यों के साथ बातचीत कर रही है।
इस समय मेयर के लिए प्रमुख उम्मीदवारों में राजकंवल प्रीत सिंह लक्की का नाम सबसे आगे है। लक्की चौथी बार पार्षद बने हैं और उनकी बेटी ने भी वार्ड नंबर 9 से पार्षद की सीट जीती है। उनकी ईमानदार छवि और नगर निगम के मुद्दों के प्रति उनके प्रयासों को देखते हुए, लक्की को शहरवासियों का समर्थन मिला है। लक्की ने नगर निगम में विकासात्मक कार्यों के लिए खुद की जेब से खर्च किया है और इस कारण उनके प्रति लोगों का विश्वास बना हुआ है। अगर लक्की मेयर बनते हैं, तो वे अमृतसर की कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, जिससे शहर की छवि में सुधार होगा।
दूसरी ओर, निगम चुनाव में शामिल होने वाले विकास सोनी भी मेयर की दौड़ में हैं। वे पूर्व डिप्टी सीएम ओम प्रकाश सोनी के भतीजे हैं और दूसरी बार पार्षद बने हैं। विकास सोनी के पक्ष में भी कई कांग्रेस पार्षद खड़े हैं। उन्होंने भी अपने वार्ड में विभिन्न समस्याओं का समाधान किया है और स्थानीय लोग उन्हें पसंद करते हैं। इस प्रकार, अमृतसर नगर निगम चुनाव में मेयर के लिए मुकाबला दिलचस्पी भरा हो गया है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का निर्णय किस दिशा में जाता है। इस निर्णय से न केवल पार्टी की आगामी राजनीतिक दिशा स्पष्ट होगी बल्कि अमृतसर शहर के विकास की गति को भी प्रभावित करेगी।