पंजाब सरकार ने आज केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत नई कृषि मार्केटिंग नीति के ड्राफ्ट पर आढ़तियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में आढ़तियों ने भी किसानों की तरह इस नीति का विरोध दर्शाया है। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष, विजय कालड़ा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र द्वारा जारी ड्राफ्ट को रद्द किया जाए। उनका मानना है कि इस ड्राफ्ट के माध्यम से मंडियों पर कॉरपोरेट कंपनियों का दबदबा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। कालड़ा ने आंदोलनरत किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के संदर्भ में कहा कि ऐसे नेताओं की जान अनमोल है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यह बैठक कृषि मंत्री गुरमीत सिंह की अध्यक्षता में हुई जिसमें पंजाब के विभिन्न हिस्सों से आढ़ती शामिल हुए। इस दौरान कृषि मंत्री ने बताया कि पंजाब का मंडी बोर्ड एशिया में सबसे मजबूत है और केंद्र की ओर से इसे समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस ड्राफ्ट से लोगों को गंभीर नुकसान होने की आशंका है और वह सभी वर्गों से इस पर सुझाव इकठ्ठा करने में व्यस्त हैं। कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र को ड्राफ्ट पर उत्तर देने से पहले विभिन्न पक्षों से फीडबैक लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने कृषि मार्केटिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट 25 दिसंबर को जारी किया था, जिसमें पंजाब सरकार को इस पर अपनी राय देने के लिए कहा गया था। इसके बाद, राज्य सरकार ने किसानों के साथ प्रारंभ में चर्चा की, जिसमें farmers ने इस नीति को पूर्ण रूप से अस्वीकार कर दिया। इसके पश्चात सरकार ने अन्य वर्गों के साथ भी बैठक करने का निर्णय लिया, जिससे किसानों और आढ़तियों के विचारों का समावेश किया जा सके। यह बैठक भी उसी संदर्भ में हुई है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने केंद्र सरकार से इस नीति पर सुझाव देने के लिए तीन सप्ताह की अवधि का अनुरोध किया है, जिसे केंद्र द्वारा 10 जनवरी तक का समय दिया गया है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब सभी पक्ष इस बात से सहमत हैं कि यदि इस ड्राफ्ट को लागू किया गया, तो इससे मंडी बोर्ड को खतरा हो सकता है। यह स्पष्ट है कि पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को लेकर सभी वर्ग चिंतित हैं और सरकार इस मुद्दे पर गहरी नजर रखे हुए है।
आढ़तियों और किसानों की एकजुटता से यह संदेश साफ है कि वे अपनी कृषि प्रणाली को किसी भी प्रकार के आक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए तत्पर हैं। इस समय केंद्र सरकार को चाहिए कि वह पंजाब के लोगों की चिंताओं को गंभीरता से ले और एक ऐसी नीति तैयार करे, जो सभी पक्षों के हितों का ख्याल रखती हो।