फाजिल्का अस्पताल में चोरी: ताला तोड़ा, सर्जिकल उपकरण और बीपी इंस्ट्रूमेंट गायब!

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फाजिल्का के पुराने सरकारी अस्पताल में बने पीपी यूनिट में चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना के पीछे चोरों की एक टोली का हाथ है, जिन्होंने ताला तोड़कर यूनिट के अंदर प्रवेश किया और वहां से सर्जरी में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों को चुरा लिया। चोरी गए सामान में किडनी ट्रे, स्टेथोस्कोप, और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। इस घटना से अस्पताल के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है, और अब पुलिस एक्शन लेने की दिशा में कदम उठा रही है।

एएनएम शालू रानी ने बताया कि फाजिल्का में स्थित प्रताप बाग के पास के पुराने अस्पताल की इमारत में यह पीपी यूनिट स्थित है। उन्होंने आज जब यूनिट का दौरा किया, तो देखा कि ताले को तोड़ दिया गया है और दरवाजे को भी क्षति पहुंचाई गई है। जब उन्होंने अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो उन्हें वहां कई जरूरी सामान गायब मिले, जिसने उन्हें काफी चिंतित किया। उन्होंने बताया कि चोरी गए सामान में सर्जिकल उपकरण, किडनी ट्रे, स्टेरलाइजर, स्टेथोस्कोप और बीपी मापने वाले उपकरण शामिल हैं।

चोरी की इस घटना से अस्पताल में कार्यरत स्टाफ और चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, शालू रानी ने तुरंत जिला सरकारी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) को इसकी जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद एसएमओ ने इसे तुरंत पुलिस के पास ले जाने का निर्णय लिया ताकि मामले की जांच की जा सके और आरोपियों को पकड़ा जा सके।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की मदद से चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, आस-पास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि इस अपराध के पीछे के मकसद और चोरों की पहचान को जल्दी से जल्दी स्थापित किया जा सके।

फाजिल्का में इस तरह की घटनाएं चिकित्सा सेवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती हैं। अस्पताल परिसर में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता का महसूस किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इस घटना ने इस बात की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है कि इस तरह की चिकित्सा सामग्री को सुरक्षा में रखने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को चिकित्सा सेवाओं में रुकावट का सामना न करना पड़े।