देश की प्रमुख टेक्सटाइल कंपनी ट्राइडेंट ने एक सकारात्मक पहल के तहत 2,000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर किसानों को पराली जलाने से रोकने में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह कदम न केवल उत्तरी भारत में वायु गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक होगा, बल्कि यह खतरनाक उत्सर्जन को कम करके हवा को स्वच्छ रखने में भी मदद करेगा। इस पहल के माध्यम से पंजाब और हरियाणा के निवासियों को प्रदूषण से उत्पन्न धुएं से राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ट्राइडेंट की इस योजना का नेतृत्व कंपनी के संस्थापक राजिंदर गुप्ता ने किया है, जिन्होंने किसानों से संवाद स्थापित कर उन्हें पराली को जलाने के बजाय उसके उपयोग पर जोर दिया। कंपनी ने हाल ही में पराली को अपने औद्योगिक बायलरों में ईंधन के रूप में प्रयोग करना शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप एक सकारात्मक दिशा में विकास देखा गया। ट्राइडेंट ने साबित किया कि वे केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि कृषि से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
इस पहल से न केवल किसानों को आर्थिक लाभ हुआ, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। कंपनी के एडमिन हेड रूपिंदर गुप्ता ने बताया कि ट्राइडेंट पराली जलाने से रोकने और उसे ऊर्जा में परिवर्तित करने वाला पहला औद्योगिक हब बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरणीय स्थिरता और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। पराली को ऊर्जा में बदलकर न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद भी है।
हर साल धान की पराली जलाने से जो पार्टिकुलेट मैटर निकलता है, वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर जैसे क्षेत्रों में, हवा की गुणवत्ता में गिरावट आती है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है। ट्राइडेंट की पहल ने इस गंभीर समस्या का समाधान प्रस्तुत किया है, जिससे आने वाले समय में सर्दी और प्रदूषण के घातक प्रभावों से बचा जा सकेगा।
इस सकारात्मक प्रयास की सराहना पंजाब के सीएम भगवंत मान और हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने की है। उन्होंने ट्राइडेंट के प्रयासों को सराहा और कहा कि यह कदम किसानों और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने अन्य उद्योगों से भी इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया, ताकि पंजाब और हरियाणा में प्रदूषण मुक्त वातावरण मिलने के लक्ष्य को साकार किया जा सके। यह पहल न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।