हजारीबाग शहर में नो एंट्री के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे भारी वाहन
हजारीबाग, 26 नवंबर (हि.स.)। शहर के भीतर सुबह से रात आठ बजे तक जब नो एंट्री लगता है तो कैसे शहर में भारी वाहन घुस रहे हैं। यही सवाल हजारीबाग की जनता प्रशासन से कर रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस प्रशासन से मिली भगत के कारण ऐसा हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि शहर में गत सोमवार को हाइवा की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत हो गई और एक परिवार उजड़ गया। कैसा लगता होगा उस परिवार को जो अब चिराग ही नही बचा। यही बातें शहर के चारों ओर हो रही है। लोगों का कहना है कि अब तो हजारीबाग शहर में बच्चे स्कूल भी नहीं जाएं कारण कि यहां के प्रशासन को यह पच ही नहीं रहा। प्रशासन के मना करने के बाद भी भारी वाहनों का परिचालन जो हो रहा है। यह घटना कोई नई नहीं है। गत वर्ष भी इस मार्ग में एनटीपीसी के हाइवा ने कई मां के कोख को उजाड़ दिया है। वह भी डीपीएस एंजल के बच्चे थे। यहां स्कूलों की बात की जाए तो छुट्टी के समय बच्चों को भेड़ बकरी की तरह गेट से निकाल देते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ देवेन्द्र सिंह देव ने कहा कि जिला प्रशासन के इस कानून को वाहन चालक और एनटीपीसी के अधिकारी नहीं मानते हैं। इससे लगता है कि प्रशासन एनटीपीसी से मिला हुआ है। तब तो भारी वाहन शहर में प्रवेश कर रहा है। परवीन मेहता ने कहा कि शहर के पुलिस प्रशासन सिर्फ दो पहिया वाहनों पर ही टिकी हुई है। बस चालान काटो पेट भरो, इससे ज्यादा इन्हें कुछ मतलब नहीं है।
—————