जगराओं में किसानों का हंगामा: डीसी दफ्तर पर घेराव, नई कृषि नीति की मांग!

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लुधियाना के जगराओं में किसानों का आंदोलन जारी है, जहां भारतीय किसान यूनियन डकौंडा के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देश पर जिला कलेक्टर (डीसी) कार्यालय का घेराव किया। इस अवसर पर किसान समुदाय ने अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। जगराओं के साथ-साथ सिधवांबेट, हबड़ा, पक्खोवाल, रायकोट, सुधार, लुधियाना और मुल्लापुर जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह ललतो और जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहडाका ने किया।

किसानों ने न केवल डीसी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, बल्कि पंजाबी भवन तक एक रोष मार्च भी निकाला। उनका मुख्य ध्यान शैलर मालिकों से धान की खरीद वापस कराने, पराली को लेकर दर्ज मामलों को हटाने, जुर्माना और जमीनों की रेड एंट्री रद्द करने की मांग पर था। किसानों का आरोप है कि धान खरीदने के दौरान मशीनों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे वास्तविक 17 प्रतिशत नमी की जगह 22 प्रतिशत नमी दर्शाई जा रही है, और इससे खरीद की कीमतों में कटौती की जा रही है। ये किसान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन डकौंडा के जिला सचिव इंद्रजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कई अन्य मांगें भी उठाई हैं। इनमें से एक प्रमुख मांग देश के राष्ट्रपति से 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी है। इसके अलावा, किसानों के कर्ज माफ करने, नई कृषि नीति लाने, बायोगैस प्लांट बंद करने, फसल बीमा योजना को लागू करने और किसानों के लिए पेंशन योजना पर विचार करने के लिए राष्ट्रपति को एक संयुक्त याचिका भेजने की योजना बनाई गई है।

इस धरने में कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया, जिनमें जगरूप सिंह हसनपुर, सुखविंदर सिंह हंबरन, इंदर जीत सिंह लोधीवाल, तरसेम सिंह बासुवाल, बेअंत सिंह, हाकम सिंह और निर्मल सिंह शामिल थे। किसान इन मुद्दों के समाधान के लिए एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठाने का संकल्प लिए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उनके अनुरोधों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। उनका मानना है कि कृषि के संदर्भ में जिस प्रकार की नीतियों का पालन किया जा रहा है, वह किसानों के हितों के खिलाफ है और इसके खिलाफ ये आंदोलन आवश्यक है।

इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब के किसान अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, और वे अपनी समस्याओं का समाधान कराने के लिए संगठित होकर आवाज उठाते रहेंगे। उनकी यह मेहनत और एकता एक नया मोड़ लाने में सक्षम हो सकती है, जिससे सरकारी नीतियों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।