दो तख्तों के जत्थेदारों की बैठक में राजोआना पर चर्चा; सुखबीर इस्तीफे पर बात नहीं!

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पंजाब में चल रहे उप-चुनावों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें बलवंत सिंह राजोआना को दी गई पैरोल के बाद, दो प्रमुख तख्तों के जत्थेदारों ने एक बैठक बुलाई। हालांकि इस बैठक का स्पष्ट एजेंडा अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन इसके आयोजन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और अकाली दल के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह भूंदड़ को आमंत्रित किया गया था। बैठक में मौजूद भूंदड़ ने कहा कि इस वार्ता में सुखबीर बादल के इस्तीफे के संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई। वहीं, ज्ञानी हरप्रीत सिंह, जो इस बैठक में शामिल हुए थे, ने भी बातचीत की जानकारी साझा करने से बचते हुए कहा कि बंदी सिखों की रिहाई के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

यह बैठक श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के निवास पर आयोजित की गई थी, जिसमें श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह भी शामिल हुए। सभी नेता हाल ही में लुधियाना के गांव राजोआना में बलवंत सिंह राजोआना के भाई के भोग से लौटे थे। वहां से लौटते समय बलवंत राजोआना के साथ बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह अनुमान लगता है कि बैठक में 29 साल से जेल में कैद बलवंत सिंह राजोआना के मामले पर चर्चा की गई।

अकाली दल मौजूदा संकट से जूझ रहा है, और बैठक में इसके अंतर्गत उत्पन्न हालातों पर भी चर्चा होने की बात की जा रही थी। लेकिन इसके बावजूद सभी ने इस पर चर्चा न होने का दावा किया है। पहले ही सुखबीर बादल ने अपनी वर्किंग कमेटी को इस्तीफा सौंपा था, जिसकी वजह से पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनके खिलाफ लगाये गए आरोपों और दल में विभाजन के चलते अकाली दल के हालात खराब हो गए हैं, जिसका असर उप-चुनावों में भी पड़ा है।

इस बीच, अकाली दल के उपाध्यक्ष अनिल जोशी ने भी पार्टी की कार्यप्रणाली और सुखबीर बादल पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। ऐसी स्थिति में, जहां अकाली दल ने उप-चुनावों से दूरी बनाने का फैसला किया, यह साफ़ है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी विरोध और असहमति की स्थिति बनी हुई है। निर्णायक समय में, जब राजनीतिक हालात नाज़ुक हैं, यह बैठक और नेता जनसामान्य के बीच चिंता का विषय बनी हुई है।

इन सबके बीच, समाज में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर इन सभी घटनाक्रमों पर है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पंजाब की राजनीति में आगामी समय में कई मोड़ आ सकते हैं। इन बैठकों और चर्चाओं का प्रभाव भविष्य में होने वाले चुनावों पर दूरगामी होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।