बरनाला: गेस्ट फैकल्टी और कोरोना वालंटियर्स की सांसद आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन!

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पंजाब के बरनाला में रविवार को सरकारी कॉलेजों के गेस्ट फैकल्टी प्रोफेसरों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व बरनाला सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के घर के बाहर किया गया, जहां गेस्ट प्रोफेसर अपनी salaries और नौकरी की सुरक्षा के लिए आक्रोश व्यक्त करते हुए नजर आए। इससे पहले, उन्होंने शहर में इंसाफ रैली का आयोजन भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान, कोरोना वालंटियर्स ने भी सांसद के बाहर धरना दिया, जहां उनकी समस्याओं को भी उजागर किया गया।

प्रदर्शन कर रहे गेस्ट फैकल्टी प्रोफेसरों ने आरोप लगाया कि वे पिछले 20 वर्षों से सरकारी कॉलेजों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी नौकरी को नियमित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे कठिनाइयों के समय में भी कॉलेजों में मामूली वेतन पर काम करते रहे हैं किंतु सरकार ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया। गेस्ट फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि भले ही उन्होंने सरकारी कॉलेजों में आधे से ज्यादा समय बिताया हो, लेकिन उनकी नौकरी की सुरक्षा का कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। इस कारण आज वे बरनाला में आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उम्मीद करते हुए कि उनकी मांगे सरकार के सामने रखी जाएंगी।

इन शिक्षकों ने यह भी कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को वोट देकर सत्ता में पहुंचाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे आज भी सुरक्षित नौकरियों की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनकी तुलना में अनेक युवा सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। उनके तर्क के अनुसार, पंजाब सरकार से उनकी मांग है कि उनकी नौकरी को 58 साल तक सुरक्षित रखा जाए। यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे आने वाले चुनावों में कड़ी कार्रवाई करने के लिए बाध्य हो सकते हैं।

इसी दिन, कोरोना वालंटियर्स ने भी अपनी यथास्थिति से आक्रोशित होकर सांसद के घर के बाहर प्रदर्शन किया। वालंटियर्स रितु और राजविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग में भर्ती किया गया था, लेकिन महामारी समाप्त होते ही उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि हालांकि चरणजीत चन्नी के नेतृत्व में उन्हें पुनः नियुक्त करने की कोशिश की गई थी, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद से उनकी स्थिति दयनीय हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बार-बार उनकी नियुक्ति का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे भविष्य में बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले साल दिवाली पर मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में उनकी समस्याओं के समाधान का वादा किया गया था, लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कोरोना वॉलंटियर्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन सरकार की ओर से अब तक उनकी कोशिशों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया है। ऐसे में, अब उनका इरादा है कि वे एकजुट होकर अपनी आवाज़ को और ऊँचा करेंगे।