संगरूर में डेंगू का कहर: उद्योगपति की मां का तेज बुखार से निधन

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पंजाब के संगरुर से एक दुखद खबर आई है, जहां डेंगू बुखार के कारण एक महिला की जान चली गई। भारतीय उद्योगपति गुरविंदर सिंह रिंकू की मां, लक्ष्मी देवी, डेंगू से पीड़ित थीं और उनकी आकस्मिक मृत्यु से स्थानीय निवासियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। लक्ष्मी देवी को पहले एक तेज बुखार की समस्या थी, लेकिन जब उनकी स्थिति अचानक बिगड़ी, तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में किए गए चिकित्सा परीक्षणों में उनकी डेंगू जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें पटियाला के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उपचार के बावजूद उनकी मृत्यु हो गई।

लक्ष्मी देवी की मृत्यु ने संगरुर के नागरिकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना के बाद विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने न केवल लक्ष्मी देवी के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर भी चिंता जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेंगू के खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया है, जबकि यह बीमारी शहर में तेजी से फैल रही है। कई संगठनों का यह मानना है कि प्रशासन द्वारा केवल औपचारिकता के लिए कुछ एक दिन फॉगिंग मशीन चलाने या जागरूकता कार्यक्रम चलाने का प्रयास किया जाता है, जिससे असली समस्या के समाधान में कोई मदद नहीं मिलती।

बता दें कि डेंगू एक गंभीर बीमारी है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलती है और इसके लक्षणों से बचने के लिए कड़े सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। लेकिन संगरुर के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से डेंगू के मामलों में इजाफा हो रहा है और यह स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। लोग यह मांग कर रहे हैं कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग को डेंगू से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाना चाहिए। केवल औपचारिकताओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें प्रभावी नीतियों और उपायों को लागू करने की जरूरत है।

इसके अलावा, स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर एक आह्वान किया है कि वे अपने अधिकारियों से उचित ध्यान देने की अपेक्षा करते हैं। उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में और भी जान माल का नुकसान हो सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से यह भी अपील की है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। लक्ष्मी देवी की असामयिक मृत्यु ने यह साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुधार की आवश्यकता है, ताकि उन्हें विश्वसनीयता और सुरक्षा की भावना दिलाई जा सके। इसके साथ ही, सामाजिक संगठनों ने भी नागरिकों को जागरूक करने और सुरक्षा कदम उठाने के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।