फतेहगढ़ साहिब में पराली जलाने पर SDM की जबरदस्त कार्रवाई, किसानों पर मुकदमा दर्ज!

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फतेहगढ़ साहिब जिले में पराली जलाने के मामलों में लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। हाल ही में, बस्सी पठाना में उप जिला अधिकारी (एसडीएम) हरवीर कौर ने खेतों में पराली जला रहे किसानों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया। इस दौरान, जहां-जहां पराली को आग लगाई जा रही थी, वहां फायर ब्रिगेड की टीम के साथ मिलकर आग बुझाई गई। इसके परिणामस्वरूप, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कानूनन कार्रवाई भी की गई। एसडीएम हरवीर कौर की अगुवाई में एक टीम में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, ब्लाक विकास एवं पंचायत अधिकारी समेत अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने खेतों में जाकर गंभीरता से आग बुझाने का कार्य किया।

बस्सी पठाना क्षेत्र के गांव जैसे शहीदगढ़, फतेहपुर राइयां, रैली, और क्रीमपुरा में किसानों द्वारा पराली जलाने की घटनाएँ सामने आई थीं। एसडीएम की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल आग बुझाने के साथ ही किसानों को पराली को जलाने से रोकने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही, उन्होंने कृषि प्रबंधन के लिए उपयोग में लाई जा रही मशीनरी की जांच भी की और सुनिश्चित किया कि किसान सुधारात्मक कदम उठाएं।

एसडीएम हरवीर कौर ने इस मुहिम के संदर्भ में बताया कि यह अभियान जिला आयुक्त सोना थिंद के निर्देशों के अनुपालन में चलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी सूरत में माफी नहीं दी जाएगी। इस प्रक्रिया में किसानों पर केस दर्ज कराने के साथ-साथ उनकी भूमि रजिस्ट्रेशनों में भी रेड एंट्री की जा रही है। यह कदम सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है ताकि इस समस्या को गंभीरता से लिया जा सके और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

खेतों में पराली जलाने के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान में प्रशासन ने किसानों से सहयोग की अपील की है। प्रशासन ने किसानों को समझाया है कि पराली को जलाने के बजाय इसे मिट्टी में मिलाना या पराली की गांठें बनाना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद होगा। यह न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि इससे कृषि भूमि की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, फतेहगढ़ साहिब में प्रशासनिक प्रयासों से पराली जलाने की इस समस्या पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उन्हें वैकल्पिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य है। इससे न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि किसानों की फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी संभव होगी।