चंडीगढ़ नगर निगम का वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम अपनी कार्यप्रणाली में कमी से जूझ रहा है, जिसके कारण यहां कचरा निस्तारण की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं। निगम ने सेक्टर 25 और डड्डूमाजरा में कचरा प्रोसेसिंग के लिए दो प्लांट स्थापित किए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रतिदिन लगभग 70 टन कूड़ा डंपिंग साइट पर फेंका जा रहा है। इस स्थिति पर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घर-घर जाकर कचरा संग्रहण और सूखे तथा गीले कचरे के पृथक्करण में कमी, नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग के लिए चिंता का विषय बन चुका है। यह सारी गतिविधियाँ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सुनवाई को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कचरे की प्रोसेसिंग प्लांट में सूखे और गीले कचरे का ढेर बढ़ रहा है, जबकि इनके पृथक्करण की प्रक्रिया में गिरावट आ रही है। ऐसे में, अधिकारियों ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेष रूप से एनजीटी की सुनवाई से पहले, यह जरूरी है कि कचरे का पृथक संग्रहण सुनिश्चित किया जाए ताकि डंपिंग साइट पर कचरे की मात्रा को नियंत्रण में रखा जा सके। इंजीनियरिंग विभाग ने स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी को इस मामले में पत्र लिखकर कचरे के पृथक संग्रहण में सुधार की अपील की है।
मौजूदा स्थिति के अनुसार, नगर निगम के पास केवल सेक्टर 25 और डड्डूमाजरा के प्लांट हैं जो सूखे और गीले कचरे का प्रोसेसिंग कर रहे हैं, फिर भी अधिकतर कचरा बिना पृथक किए ही डंपिंग साइट पर पहुँच रहा है। उस पर, शहर में प्रति दिन औसतन 70 टन मिश्रित कचरा फेंका जा रहा है, जो कि चिंताजनक है। इस समस्या के निदान के लिए नगर निगम द्वारा कचरें के अलग-अलग भविष्य में प्रोसेसिंग सुनिश्चित करने के लिए नई मशीनरी लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसकी क्षमता 100 टन प्रति दिन होगी, और इसे 30 नवंबर तक चालू करने की योजना है।
नगर निगम के मुख्य अभियंता ने इस विषय पर एक पत्र में एनजीटी को सही स्थिति की सूचना देने और संभावित वित्तीय दंड से बचने के लिए कचरे के पृथक संग्रहण और प्रोसेसिंग को सही दिशा में लाने पर जोर दिया है। डड्डूमाजरा प्रोसेसिंग संयंत्र की क्षमता 200 टन प्रति दिन है, जिसे पूरी तरह से पृथक कचरे की प्रोसेसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को प्राथमिकता देने से शहर में कचरे का बेहतर हैंडलिंग किया जा सकेगा और डंपिंग साइट पर कचरे के ढेर को कम किया जा सकेगा। इस संदर्भ में ठोस कदम उठाने की अत्यंत आवश्यकता महसूस की जा रही है।