पंजाब में धान लिफ्टिंग पर बवाल: AAP-BJP नेताओं के घरों पर प्रदर्शन, DAP संकट गरमाया!

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भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने धान उठान और डाइमैमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कमी के मुद्दे पर अपनी आगे की रणनीति में बदलाव किया है। नए निर्णय के तहत, यूनियन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों और भाजपा के नेताओं के घरों के सामने पिछले 16 दिनों से चल रहे स्थायी धरने को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके बजाय, अब चार महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों—बरनाला, गिद्दड़बाहा, चब्बेवाल और डेरा बाबा नानक—में इन नेताओं के निवास स्थानों के बाहर धरना दिया जाएगा। यूनियन के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने इस नई रणनीति की जानकारी दी और बताया कि 3 तारीख को जिला स्तर पर बड़ी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जबकि धरनों की शुरुआत 4 नवंबर से की जाएगी।

उगराहां ने स्पष्ट किया कि धान के उठान से यूनियन संतुष्ट नहीं है और इसे केंद्र तथा पंजाब सरकार की भाजपा सरकार की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि धान उठान और मंडियों में डीएपी की कमी का मुद्दा गंभीर है और इस पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यूनियन ने अपनी संघर्ष की योजना में बदलाव करने का निर्णय लिया है, लेकिन 25 टोल प्लाजाओं को अभी भी मुक्त रखा जाएगा।

संघर्ष की नई रणनीति के तहत, सभी किसान नेता अब स्थानीय मंडियों में सक्रिय रहेंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि किसान वहां किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करें। यदि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो किसान तुरंत उस पर कार्रवाई करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों का भी घेराव कर सकते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसान संगठन केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे अपने हितों के लिए सीधे क्रियाशील रहेंगे।

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अपने गैर-राजनीतिक संघर्ष को जारी रखने का फैसला किया है। मोर्चा ने स्टेट हाईवे के किनारे अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और साफ किया है कि यदि स्थिति गंभीर हुई तो वे सड़क पर उतरने से भी नहीं चूकेंगे। पहले जब उन्होंने हाईवे को जाम किया था, तब सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और किसानों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। इससे पहले मंत्री गुरमीत सिंह और खाद्य आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने किसानों के साथ बातचीत की थी, जिससे स्थिति सामान्य हुई थी।

इस प्रकार, किसान यूनियन ने अपनी नई योजना की घोषणा करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए तैयार हैं और किसी भी प्रकार की समस्या के खिलाफ खड़े रहेंगे। उनके लिए यह संघर्ष न केवल वर्तमान परिस्थितियों से निपटने के लिए, बल्कि भविष्य में भी किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक है।