पंजाब यूनिवर्सिटी में मासिक धर्म अवकाश: छात्राओं को हर सेमेस्टर में 4 छुट्टियों की सौगात!

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पंजाब यूनिवर्सिटी ने हाल ही में सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे मासिक धर्म अवकाश नीति की जानकारी को ध्यान आकर्षित करने वाले स्थानों पर प्रदर्शित करें। इसका उद्देश्य यह है कि छात्राएं इस नीति के बारे में जागरूक हों। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्राएं अभी भी इस नीति से अवगत नहीं हैं। कुलपति द्वारा स्वीकृत इस नीति के अनुसार, छात्राओं को हर महीने एक दिन का मासिक धर्म अवकाश दिया जाएगा, जिसमें एक सेमेस्टर में अधिकतम चार छुट्टियां ली जा सकती हैं। यह छुट्टी केवल शिक्षण दिनों में मान्य है, जबकि परीक्षा के समय इसे नहीं लिया जा सकता।

छात्राओं को अपनी अनुपस्थिति की सूचना देने के लिए विभागीय कार्यालय में उपलब्ध विशेष फॉर्म का उपयोग करना अनिवार्य है। आवेदन करने के लिए उन्हें अपनी अनुपस्थिति के पांच कार्य दिवसों के भीतर फॉर्म भरना होगा। इस अवकाश को स्व-प्रमाणन के आधार पर दिया जाता है, लेकिन इसके लिए विभाग के अध्यक्ष या निदेशक से अनुमोदन आवश्यक होता है। अप्रैल और सितंबर में इस नीति की जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पहले ही दो बार रिमाइंडर जारी किए जा चुके हैं, फिर भी कई छात्राएं इस सुविधा से अनभिज्ञ हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस छात्र परिषद (पीयूसीएससी) के उपाध्यक्ष और एनएसयूआई के सदस्य अर्चित गर्ग ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्य समस्या यह है कि विश्वविद्यालय और विभाग सोशल मीडिया पर इस नीति की जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, छात्राओं को इस नीति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल वेबसाइट पर सूचना डालने से बात नहीं बनेगी; छात्रों और कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा के माध्यम से ही जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

यह नीति एनएसयूआई के पिछले चुनावी वादों का हिस्सा थी, जिसे पीयूसीएससी अध्यक्ष जतिंदर सिंह ने छात्र हित में उठाया था। इसे विभिन्न घटनाओं के दौरान छात्राओं के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल छात्राओं को मानसिक और शारीरिक आराम मिलेगा, बल्कि इससे उन्हें अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।

इस पूरे मामले में छात्र संघर्ष की महत्ता को समझते हुए संस्था को भी चाहिए कि वह इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कदम उठाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी छात्राएं इस सुविधा का लाभ उठा सकें और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। इस नीति के व्यापक प्रचार-प्रसार से न केवल छात्राओं की जानकारी में वृद्धि होगी, बल्कि यह विश्वविद्यालय में समानता और समर्पण के माहौल को भी बढ़ाएगी।