पंजाब में सड़कों से आंदोलन हटा, मंत्रियों से वार्ता जारी, धान लिफ्टिंग पर संघर्ष जारी!

Share

पंजाब में किसानों का संघर्ष आज (रविवार) भी जारी रहा, जहां उन्होंने मंडियों में धान की उठान की धीमी गति और डीएपी की कमी के मुद्दों पर दो मंत्रियों के साथ चर्चा की। इस मीटिंग में खाद्य आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह शामिल हुए। बैठक के बाद किसानों ने यह निर्णय लिया कि उनका आंदोलन जारी रहेगा, लेकिन वे सड़कों पर लगाए गए जाम को हटा देंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस निर्णय को जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर लिया गया बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो आंदोलन को फिर से तेज किया जा सकता है।

किसानों ने विभिन्न प्रमुख राजमार्गों जैसे फगवाड़ा, मोगा-फिरोजपुर हाईवे, संगरूर-बरनाला हाईवे और गुरदासपुर-श्री हरगोबिंदपुर में धरना दिया था। मीटिंग का आयोजन लगभग दो घंटे तक चला। इस बीच, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ सम्पर्क किया है, और सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पहल करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि किसानों को सड़कों पर बैठने से समस्या का समाधान नहीं होगा और आम जनता को हो रही कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील रहना आवश्यक है।

इस मामले में पंजाब भाजपा नेताओं ने गवर्नर से भी मुलाकात की। भाजपा के सीनियर नेता अविनाश राय खन्ना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारियों को धान की लिफ्टिंग में तेजी लानी चाहिए, ताकि किसान दीपावली का त्योहार अपने परिवार के साथ मना सकें। उन्होंने राज्य सरकार पर यह आरोप लगाया कि देरी के लिए वह पूरी तरह से असफल साबित हुई है। भाजपा नेता गुरमीत सिंह सोढ़ी ने भी सरकार पर आलोचना की और कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही आवश्यक धनराशि प्रदान की थी।

पंजाब सरकार ने दावा किया है कि धान की लिफ्टिंग में सुधार देखने को मिल रहा है। 21 अक्टूबर को जहां लिफ्टिंग की मात्रा 1.39 लाख मीट्रिक टन थी, वही 26 अक्टूबर को यह संख्या बढ़कर 3.83 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गई। सरकार का कहना है कि इस समय 2169 मिलर्स ने धान की लिफ्टिंग शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार 30 जून तक धान का उठाव नहीं करती है, तो पंजाब सरकार स्वयं इसके उठाव की जिम्मेदारी लेगी।

डीएपी की कमी के मुद्दे पर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पंजाब में डीएपी की 1.5 लाख मीट्रिक टन की कमी है, विशेषकर जब राज्य देश के अनाज भंडार में 50 प्रतिशत गेहूं का योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से निवेदन किया कि पंजाब को प्राथमिकता पर डीएपी प्रदान की जाए, अन्य राज्यों को बाद में दिया जाए, ताकि गेहूं की बिजाई समय पर हो सके। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।