पंजाब रोडवेज, पनबस, और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुक्तसर बस स्टैंड पर प्रभावी प्रदर्शन किया। इस दौरान, यूनियन ने बस स्टैंड को बंद करके राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया। बसों का संचालन बस स्टैंड के बाहर से हो रहा था, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। इस मौके पर राज्य संस्थापक कमल कुमार ने बताया कि इससे पूर्व, 1 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ यूनियन की बैठक हुई थी। इसमें प्रमुख सचिव पंजाब, ट्रांसपोर्ट सचिव, पनबस और पीआरटीसी के प्रबंधन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की मांगों का एक महीने में समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कुछ भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
यूनियन की मुख्य मांगों में अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करना, ठेकेदारी प्रणाली में सुधार, समान काम के लिए समान वेतन लागू करना, तथा कर्मचारियों की बहाली शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने विधायक निवासों के सामने कम वेतन वाली नौकरी करने वालों की स्थिति में सुधार के लिए भी आवाज उठाई। उन सभी ने एक स्वर में यह व्यक्त किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करके उन्हें अपने कार्य की उचित मान्यता मिलनी चाहिए। इन समस्याओं के समाधान के लिए अब तक गठित समिति ने कोई ठोस एजेंडा भी तैयार नहीं किया है, जिससे कर्मचारियों के बीच में गहरा असंतोष बढ़ता जा रहा है।
कमल कुमार ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने बड़े बदलावों का वादा किया था, लेकिन अब उन वादों की सच्चाई संदेह में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 3 नवंबर को बरनाला और चब्बेवाल में एक विशाल झंडा मार्च आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सरकार की नीतियों और उनके वादों की पोल खोली जाएगी। इसके बाद, 9 नवंबर को डेरा बाबा नानक और गिदड़बाहा में भी इसी तरह का प्रदर्शन करने की योजना है।
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी सभी मांगों का समाधान नहीं किया जाता है, तो वे भविष्य में पूर्ण चक्का जाम करने का निर्णय लेने के लिए मजबूर होंगे, जिसका पूरा दारोमदार राज्य सरकार और प्रबंधन पर होगा। यह प्रदर्शन कर्मचारियों के अधिकारों के लिए उठाई गई एक सशक्त आवाज है, जो हर स्तर पर प्रशासन से उनके प्रति उचित नीतियों और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।