सुप्रीम कोर्ट की हरियाणा-पंजाब को चेतावनी: पराली जलाने पर जल्द लगाम नहीं लगी तो सख्त करे आदेश!

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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सुनवाई हुई। इस दौरान पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी अदालत में पेश हुए। कोर्ट ने पंजाब सरकार को झूठी जानकारी साझा करने पर सख्त फटकार लगाई। हरियाणा सरकार के कार्यों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया और कहा कि हमें कड़े आदेश देने के लिए मजबूर न करें। जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस ए अमानुल्लाह और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने खेतों में पराली जलाने के संदर्भ में दोनों राज्यों की कोशिशों को सिर्फ दिखावटी बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और प्रदूषण में रहना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के मामले में केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) के तहत नियम बनाने और जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आयोग ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक कठोर उपाय लागू करने के लिए कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई है। इस दौरान केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि पराली जलाने वालों के खिलाफ 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की जाएगी, और अगली सुनवाई 4 नवंबर को निर्धारित की गई है।

हरियाणा के मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाएं 400 के आसपास हैं, लेकिन कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार के आंकड़े निरंतर बदलते रहते हैं और कार्रवाई में स्पष्टता की कमी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पूछा कि क्या किसानों को पराली के निस्तारण के लिए सहायता दी जा रही है, जिसका मुख्य सचिव ने उत्तर दिया कि 1 लाख मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, पंजाब के मुख्य सचिव को भी कोर्ट ने फटकार लगाई और बताया कि उनके द्वारा केवल 473 लोगों से नाम मात्र का जुर्माना लगाया गया है, जबकि 600 से अधिक मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों की सरकारों से यह भी पूछा कि क्या वे किसानों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठा रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सही कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए हरियाणा में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे स्थानीय निवासियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। वहीं, पंजाब में भी कई शहर प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय और राज्य सरकारों द्वारा की जा रही प्रयासों में कमी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि समय आ गया है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त उपाय किए जाएं। हरियाणा सरकार ने हाल ही में प्रदूषण को लेकर कई पहल की हैं, जबकि पंजाब सरकार को भी अपनी कार्य योजनाओं में सुधार करने की आवश्यकता है। इस सब के बीच, प्रदूषण की रोकथाम के लिए नागरिकों में जागरूकता फैलाना और ठोस कार्रवाई करना आवश्यक है ताकि सभी के स्वास्थ्य और जीवन को सुरक्षित रखा जा सके।