गुरदासपुर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र जज बलजिंदर सिंह सिद्धू ने एक महत्वपूर्ण मामले में नाबालिग लड़की को विवाह का लालच देकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को 20 वर्ष की कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1 लाख 65 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 17 जुलाई 2021 का है, जब कलानौर पुलिस थाना में संबंधित धाराओं के अंर्तगत शिकायत दर्ज की गई थी। आरोपी, साजन मसीह, वारदात के समय नाबालिग लड़की की शादी का झांसा देकर उसे भगाने में सफल रहा था।
लड़की के पिता ने शिकायत में बताया था कि उसकी बेटी, जो कि 11वीं कक्षा की छात्रा थी, 15-16 जुलाई 2021 की रात को आरोपी के द्वारा भगाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और नाबालिग लड़की को सुरक्षित बरामद किया। यह घटना न केवल लड़की और उसके परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी चिंता का विषय बना। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई, जिसमें आरोपी को धारा 376 के तहत 10 वर्ष की जेल, धारा 363 के तहत 7 वर्ष की जेल, और धारा 366 के तहत 10 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई।
इसके साथ ही, अदालत ने पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आरोपी को 20 वर्ष की जेल की सजा और 1 लाख का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अगर आरोपी इस जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त तीन महीने की सजा काटनी होगी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सजा की सख्ती आवश्यक है जिससे भविष्य में ऐसी वारदातों को रोका जा सके।
अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों और सबूतों की पुष्टि के बाद, जज ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश दिया। यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। समाज में ऐसी घटनाओं के प्रति जागरूकता और सख्त कार्रवाई की दिशा में उठाया गया यह कदम न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने में सहायक है, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
इस प्रकार के मामलों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना और कानूनी प्रक्रिया को सही तरीके से लागू करना आवश्यक है। इस मामले में अदालत की तत्परता और सख्त सजा न केवल पीड़िता के लिए राहत प्रदान करती है, बल्कि अन्य संभावित अपराधियों के लिए भी एक चेतावनी देती है। यह घटना हमें यह समझाने में भी मदद करती है कि हमें अपने समाज में नाबालिगों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है।