पंजाब में आज यानी शुक्रवार को किसानों ने 12 जिलों में भाजपा के 17 विधायकों, 6 मंत्रियों और 2 प्रमुख नेताओं के निवासों के बाहर पक्का मोर्चा आयोजित किया है। इनमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद खन्ना और विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर शामिल हैं। किसानों का यह प्रदर्शन मंडियों में धान की खरीद में हो रही गड़बड़ियों के विरोध में है। किसान नेताओं का कहना है कि इस समय भारी संख्या में किसान परेशान हैं, और यह विरोध प्रदर्शन केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ किया जा रहा है।
भारतीय किसान एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां और महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी ने बताया कि इससे पहले 25 स्थानों पर टोल चार्ज भी फ्री करवाए गए थे। वर्तमान में यह आंदोलन 50 स्थानों पर मजबूती से चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मोर्चा तब तक चलेगा जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होती। इसके साथ ही किसान नेताओं ने चंडीगढ़ में सीएम के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे किसानों को रोकने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और ऐसा करने को अनैतिक बताया है।
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां और सुखदेव सिंह कोकरी ने यह भी बताया कि उनके संगठन ने पाँच सदस्यीय प्रदेश नेतृत्व टीम के माध्यम से मोर्चा चलाने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था इस तरह से की गई है कि दिन-रात दोनों प्रकार के मार्च आयोजित किए जाएंगे। किसानों की विभिन्न मांगों में से एक महत्वपूर्ण मांग यह है कि धान की MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर निरंतर खरीद की प्रक्रिया को शुरू किया जाए। इसके अलावा, अन्य कई मुद्दों पर भी केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब सरकार की ओर से सार्थक कार्रवाई की कमी पर भी चिंता जताई गई है।
किसान नेताओं ने दोनों सरकारों पर किसी भी प्रकार की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। वे कॉर्पोरेट समर्थक विश्व व्यापार संगठन की मुक्त बाजार नीति का विरोध कर रहे हैं, जिसमें किसानों और मजदूरों के हितों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने सभी गांवों के किसानों और मजदूरों से अपील की है कि वे इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिकतम संख्या में शामिल हों और सरकार के इस “घातक हमले” का सामना करें। ऐसे समय में जब 농민ों की समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है, उनका यह संघर्ष न केवल उनके अधिकारों के लिए है, बल्कि यह पूरे किसान समुदाय के हितों की रक्षा करने का भी प्रयास है।
किसानों का यह प्रतिबद्धता और संघर्ष उनका भविष्य सहृदो की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, जिससे वे अपनी आवाज को बुलंद कर सकें और जो भी न्याय मांगते हैं, उसे प्राप्त कर सकें। यह प्रदर्शन न केवल वर्तमान परिस्थितियों के खिलाफ है, बल्कि आने वाले समय में किसानों की आवाज़ और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।