लुधियाना में फल-सब्जी विक्रेताओं का हंगामा, मंडी ठेकेदार पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप!

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लुधियाना के सब्जी मंडी में फल और सब्जियों की बिक्री करने वाले छोटे विक्रेताओं ने शुक्रवार को लुधियाना के सीपी कार्यालय के बाहर ठेकेदार और उसके कर्मचारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इन विक्रेताओं ने ठेकेदार और उसके सहकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। समूह ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और उसके लोग उन्हें जबरन अवैध वसूली का शिकार बना रहे हैं। विक्रेताओं ने बताया कि उनकी समस्याओं के बारे में पहले ही पुलिस को सूचित किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रदर्शन करने वाले विक्रेताओं ने सीपी को एक मांग पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने ठेकेदार पर अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, यह स्थिति काफी समय से चल रही है। विक्रेता साजन, नीरज नोनी, हरदेव और राजू ने बताया कि ठेकेदार अपने कर्मचारियों के माध्यम से मंडी में रेहड़ी वालों को परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई विक्रेता इस अवैध वसूली का विरोध करता है, तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं। विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें मंडी में रेहड़ी लगाने से रोका जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

उन्हें यह भी चिंता है कि आरोपियों के पीछे कुछ राजनीतिक व्यक्तियों का समर्थन है, जिससे पुलिस कार्रवाई करने में असमर्थ दिख रही है। विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की अवैध वसूली से उनकी रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पलायन की समस्या का समाधान किया जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे अपने व्यापार को सुरक्षित रूप से कर सकें।

विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें इस मुद्दे पर सख्त और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि आगे उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो सके। इस प्रकार की गतिविधियों से केवल छोटे व्यापारियों को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि यह पूरे स्थानीय बाजार की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। विक्रेता यह भी चाहते हैं कि उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाए ताकि वे अपनी रोजी-रोटी कमाने में सक्षम रह सकें।

लुधियाना के सब्जी मंडी में विक्रेताओं के द्वारा की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अब वे अन्याय और शोषण को सहन नहीं करने वाले हैं। उनकी एकजुटता से यह स्पष्ट होता है कि छोटे व्यापारियों को भी अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे कि वे इस गंभीर मुद्दे का समाधान करें।