पंजाब में किसान धान की खरीद को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आज चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए एकजुट हुए हैं। बड़ी संख्या में किसान चंडीगढ़ के सेक्टर-35 में स्थित किसान भवन पर इकट्ठा हुए हैं। इस दौरान, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए किसान भवन के गेट बंद कर दिए और वहां पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। कुछ किसान बैरिकेड्स तोड़ने की भी कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनका कहना है कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और यहां प्रदर्शन करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने पुलिस कर्मियों के सामने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का उनका अधिकार है और अगर कोई कार्रवाई होती है तो वे गिरफ्तार होने के लिए तैयार हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें तंग किया गया तो चंडीगढ़ में दूध और फलों की सप्लाई रोक दी जाएगी। इस बीच, पुलिस ने किसानों और सरकार के बीच बातचीत शुरू करने के प्रयास तेज कर दिए हैं, जिससे कि स्थिति को सामान्य किया जा सके।
कुछ दिन पहले संयुक्त किसान मोर्चा और आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी जिसमें किसानों की समस्याओं और संघर्ष की रणनीति पर चर्चा की गई थी। बैठक में यह तय हुआ था कि अगर मंडियों में धान की उचित खरीद नहीं हुई तो सीएम के आवास का घेराव किया जाएगा। उसी निर्णय के अनुसार, आज किसान चंडीगढ़ की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन कई स्थानों पर पंजाब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। चंडीगढ़ पुलिस ने भी कुछ किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया, जिससे किसान नेताओं में रोष बढ़ गया।
किसानों का कहना है कि उनका चंडीगढ़ सीएम हाउस का घेराव करने का कोई मन नहीं है, लेकिन मंडियों में धान की खरीद में बाधाएं आने के कारण उन्हें यह कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है। पिछले कुछ समय से किसानों ने अपनी फसलों को मंडियों में बेचने के लिए कदम उठाया है, लेकिन वहां पर उतनी खरीद नहीं हो रही है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है।
पंजाब सरकार ने इस संघर्ष को टालने के लिए सभी संभव प्रयास किए हैं। सरकार ने किसानों से बात करने के लिए सीएम भगवंत मान के साथ बैठक का प्रस्ताव रखा था, जो आज शाम पांच बजे आयोजित होने वाली थी। लेकिन मुख्यमंत्री दिल्ली में हैं, जहां उन्हें पंजाब के शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजने का कार्य करना है। फिर भी, किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अडिग रहने का निर्णय किया है, यह संकेत देते हुए कि वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहे किसी भी स्तर पर कराना चाहते हैं।