लुधियाना के जगराओं क्षेत्र में धान की खरीद को लेकर किसानों का गुस्सा देखने को मिला। वीरवार को, भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) की अगुवाई में किसानों ने चौकीमान टोल प्लाजा पर धरना देकर टोल को फ्री कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन से वहां से गुजरने वाले वाहन चालक बिना टोल का भुगतान किए गुजरते रहे। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा धान खरीदने का कार्य धीमी गति से किया जा रहा है, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने अपने नारेबाजी के माध्यम से सरकार से मांग की कि मंडियों में धान की खरीद में तेजी लाई जाए। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें कई दिनों तक मंडियों में बैठना पड़ रहा है, जो कि असहनीय है। इस दौरान किसान नेता सुदागर सिंह, हरनेक सिंह, गुरप्रीत सिंह और चमकौर सिंह भी मौजूद रहे। जोगिंदर सिंह उगराहां, किसान यूनियन एकता उगराहां के अध्यक्ष ने पंजाबभर में टोल प्लाजा को फ्री करने का ऐलान किया था, जिसके अनुसार फिल्लौर में भी किसानों ने हाईवे को जाम कर दिया।
इस जाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात में भारी रुकावट आई। किसान नेता जरनैल सिंह मोतीपुर और कमलजीत सिंह ने कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों को समस्या में डाल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान अपनी धान लेकर मंडियों में बैठे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा धान उठाने का कार्य नहीं हो रहा है। साथ ही, प्रशासन का तर्क है कि मंडियों में धान उठाने के लिए स्थान नहीं है, जो कि किसानों को उचित नहीं लगता।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान त्वरित रूप से नहीं किया गया, तो भविष्य में वे हाईवे को अनिश्चित काल के लिए जाम करने पर मजबूर होंगे। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे पहले ही जिला उपायुक्त जालंधर और अन्य उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। इस स्थिति के लगातार बने रहने से किसानों का नाराजगी और बढ़ सकती है, जिसके चलते उन्हें मजबूरन अपनी आवाज उठानी पड़ेगी।
किसानों का यह आंदोलन कृषि नीति में सुधार की मांग को लेकर भी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हो सके। यदि सरकार ने जल्दी से इस समस्या का हल नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और भी तेज हो सकता है, जिससे पूरे राज्य में कृषि क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। किसान अपनी मेहनत के फल को बिना किसी बाधा के पाना चाहते हैं और इसके लिए वे शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता से अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।