पंजाब के लुधियाना में दड्डा सट्टा और जुआ खेलने वालों पर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। हाल ही में CIA-3 के पुलिस कर्मियों ने 32 सेक्टर के एक स्नूकर पार्लर में छापेमारी की। यह कार्रवाई तब हुई जब पुलिस को संदेह था कि वहां दड्डा सट्टा चल रहा है। लेकिन इस छापेमारी के दौरान पुलिस को कुछ विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें बिना कोई कार्रवाई किए लौटना पड़ा। अब मामले में नया मोड़ आया है।
पुलिस ने थाना डिवीजन नंबर 7 के अंतर्गत दो लोगों, विशू नारंग और विमल नारंग, पर FIR दर्ज की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस कर्मियों के साथ असहयोग किया और उनके कर्तव्यों में बाधा डाली। FIR 132, 321, 351(2) और 3(5) BNS के तहत दर्ज की गई है। इस दौरान, विमल नारंग ने एक सीसीटीवी वीडियो साझा किया है जिसमें दिखाया गया है कि कैसे पुलिस कर्मी पार्लर के एक मैनेजर के टेबल पर बैठे युवक का मोबाइल फोन जब्त कर रहे हैं और उससे पूछताछ कर रहे हैं।
विमल नारंग का कहना है कि यह स्नूकर पार्लर केवल बच्चों के खेलने के लिए है और वहां किसी प्रकार का दड्डा-सट्टा या जुआ नहीं हुआ है। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि वहाँ आने वाले पुलिसकर्मी नशे में थे और उन्होंने उनसे 15,000 रुपये की मांग की। नारंग का दावा है कि पुलिस कर्मियों ने गल्ले से पैसे भी निकाले हैं। उन्हें जब अपनी गतिविधियों पर सवाल उठाए गए, तो उन्होंने युवकों के मोबाइल वापस कर दिए।
इस मामले में विमल नारंग ने पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस कमिश्नर को शिकायत भी दी है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि पुलिस को इस दौरान कोई भी सट्टेबाजी या जुए का सबूत मिलता है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। जांच का कार्य ASI सुखदेव सिंह कर रहे हैं, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
इस प्रकार, लुधियाना में इस छापेमारी और उसके बाद के विवाद ने पुलिस और स्थानीय व्यवसायियों के बीच tension को बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या यह विवाद स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने का कारण बनेगा। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि उन्हें इस तरह की गतिविधियों से बचने और कानून के शासन में विश्वास बनाए रखने की जरूरत है।