लुधियाना में 3.16 करोड़ की हेराफेरी: निगम अधिकारी गिरफ्तार, 2 अब भी फरार

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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने लुधियाना नगर निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर राजिंदर सिंह, कार्यकारी इंजीनियर रणबीर सिंह और डिप्टी कंट्रोलर फाइनेंस एंड अकाउंट्स पंकज गर्ग पर 3.16 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितता के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इनमें से रणबीर सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा। विजिलेंस विभाग के एसएसपी रविंदरपाल सिंह संधू ने बताया कि यह मामला लुधियाना नगर निगम के जोन सी में तैनात एक इलेक्ट्रिक पंप ड्राइवर जसपिंदर सिंह की शिकायत के आधार पर शुरू किया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक्सईएन रणबीर सिंह ने मई 2021 से सितंबर 2022 के बीच विभिन्न ट्यूबवेल कार्यों के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को अग्रिम भुगतान के रूप में कुल 3.16 करोड़ का भुगतान किया। मगर इन अधिकारियों ने एक-दूसरे के साथ मिलीभगत कर इस बजट का दुरुपयोग किया। विजिलेंस की जांच में यह सामने आया कि लुधियाना में ट्यूबवेल कार्यों के लिए पीएसपीसीएल की ओर से किसी भी प्रकार का प्रस्ताव या मांग का कोई मान्यता प्राप्त दस्तावेज नहीं मिला।

एसएसपी रविंदर पाल सिंह संधू ने बताया कि जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि रणबीर सिंह ने पीएसपीसीएल द्वारा फर्जी मांग की नोटिंग खुद की फाइल पर की थी और इसे मंजूरी के लिए सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर राजिंदर सिंह के पास भेज दिया। राजिंदर सिंह ने इस फाइल में मौजूद दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया, बल्कि उसे संयुक्त कमिश्नर और नगर निगम कमिश्नर की मंजूरी के लिए आगे भेज दिया। अभियुक्तों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और नियमों का उल्लंघन करते हुए इन दस्तावेजों को उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत किया।

भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत सभी आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में रणबीर सिंह द्वारा निकाले गए 4,34,692 रुपए अस्थायी अग्रिम के रूप में मिलते हैं, जो अभी भी बकाया हैं। विजिलेंस ने कहा है कि दूसरों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जो उस समय नगर निगम लुधियाना में तैनात थे। इस जांच के संदर्भ में अन्य संदिग्ध अधिकारियों की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार का कबाड़ होना अभी भी एक गंभीर समस्या है। विजिलेंस द्वारा की गई कार्रवाई दर्शाती है कि सरकारी कर्मचारियों की अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस तरह की कार्रवाई से लोगों में विश्वास जगता है कि न्याय एवं पारदर्शिता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आगे की कार्रवाई और अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका को स्पष्ट करने में दी जाएगी, ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके।