हरियाणा बॉर्डर पर पिछले 246 दिनों से शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे किसानों ने फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। किसान नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के साथ बैठक से इंकार कर दिया है। इस निर्णय को किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के प्रतिनिधियों ने एकत्रित होकर लिया है। किसान नेताओं ने अपनी असहमति को स्पष्ट करते हुए समिति को एक पत्र के माध्यम से अपनी स्थिति से अवगत कराया है।
किसानों का तर्क है कि बातचीत का रास्ता उनके लिए नहीं, बल्कि हरियाणा सरकार द्वारा बाधित किया गया है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि समिति ने दोनों फोरम को बैठक का न्योता भेजा, लेकिन कोई भी संगठन सुप्रीम कोर्ट से कमेटी के गठन की मांग नहीं कर रहा था। इसके साथ ही, किसानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई पक्ष नहीं हैं। उनका कहना है कि हरियाणा सरकार ने गैर-कानूनी तरीके से रास्ता बंद कर रखा है, जो कि उनकी मांगों और अधिकारों के प्रति एक बड़ी अनदेखी है।
यह संघर्ष किसानों की ओर से लंबे समय से चल रहा है, और वे अपनी मांगों को लेकर adamant हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी बात सुनेगी और उचित कदम उठाएगी। उनका मुख्य उद्देश्य फसलों की MSP की कानूनी गारंटी प्राप्त करना है, ताकि भविष्य में उन्हें उचित मूल्य मिल सके। इस मामले में किसान संगठनों का मानना है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि कृषि क्षेत्र में अन्य किसानों के लिए भी हानिकारक साबित होगा।
किसानों की यह स्थिति केवल हरियाणा की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए एक संकेत है कि उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा। किसान संगठनों का कहना है कि वे हर प्रकार के शोषण के खिलाफ हैं और अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे। इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य किसानों के हित में एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जहाँ उनके समुचित अधिकारों का सम्मान किया जाए।
अगर बात करें भविष्य की, तो किसान संगठनों का यह भी कहना है कि वे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। वे ऐसे कदम उठाने की सोच रहे हैं, जिनसे उनकी आवाज सरकार के कानों तक पहुँच सके। जरूरत पड़ी तो वे फिर से सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। इस बीच, किसानों की एकता और समर्पण इस आंदोलन की ताकत बना हुआ है, और उन्हें विश्वास है कि अंततः सरकार उनकी मांगों को स्वीकार करेगी।